इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के खातीवाला टैंक क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व में सील किए गए एक अवैध क्लिनिक में उपचार के दौरान 10 साल की मासूम बच्ची की मौत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए जाने के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर क्लिनिक को दोबारा खोला गया था और मरीजों का इलाज किया जा रहा था। बच्ची की मौत के बाद जूनी इंदौर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच करते हुए क्लिनिक संचालक श्रीचंद बागेजा और ज्ञान एस. पंजवानी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़ी विभिन्न धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। इनमें से एक संचालक को पाकिस्तानी मूल का बताया जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, खंडवा नाका स्थित गणेश नगर निवासी मनोज सोलंकी की 10 वर्षीय पुत्री दिव्यांशी को सर्दी, खांसी और तेज बुखार की शिकायत थी। परिजन उसे उपचार के लिए खातीवाला टैंक स्थित 'हर्ष क्लिनिक' लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि क्लिनिक में कथित चिकित्सकों द्वारा बच्ची को भारी मात्रा में अत्यधिक उच्च क्षमता (हाई डोज) वाली एलोपैथिक दवाएं और इंजेक्शन दिए गए, जिसके कुछ ही देर बाद बच्ची की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। घबराए परिजन उसे आनन-फानन में शासकीय महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां परीक्षण के उपरांत डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्ची की असमय मौत से परिजनों में कोहराम मच गया।


जूनी इंदौर थाना प्रभारी अनिल गुप्ता ने बताया कि हर्ष क्लिनिक पहले भी स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई के दायरे में आ चुका था। संचालकों की चिकित्सा डिग्री की वैधता, लाइसेंस और उपचार से जुड़ी भारी अनियमितताओं के चलते स्वास्थ्य विभाग ने क्लिनिक को विधिवत सील कर दिया था। आरोप है कि स्वास्थ्य महकमे के आदेशों की खुली अवहेलना करते हुए संचालकों ने सील तोड़कर या अवैध तरीके से क्लिनिक दोबारा शुरू कर दिया और भोले-भाले मरीजों की जान जोखिम में डालते रहे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि क्लिनिक में प्रतिबंधित और विशेषज्ञ सलाह के बिना नहीं दी जाने वाली एलोपैथिक दवाएं धड़ल्ले से दी जा रही थीं।


इस पूरे घटनाक्रम में एक संचालक के पाकिस्तानी मूल का होने और बिना वैध भारतीय चिकित्सा पंजीयन के प्रैक्टिस करने का मामला भी तूल पकड़ रहा है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम अब दोनों आरोपियों की शैक्षणिक योग्यताओं, मेडिकल डिग्री की प्रामाणिकता और भारत में क्लिनिक संचालन की वैधानिक अनुमति की गहन पड़ताल कर रही है। साथ ही यह गंभीर सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए जाने के बाद स्थानीय प्रशासन और निगरानी तंत्र की नाक के नीचे यह क्लिनिक दोबारा कैसे संचालित हो रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम व चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।