भोपाल। मध्य प्रदेश शासन ने मूंग की फसल को कृत्रिम रूप से जल्दी सुखाने के लिए अंधाधुंध इस्तेमाल किए जा रहे अत्यंत विषैले और घातक कीटनाशक 'पैराक्वेट डाइक्लोराइड' (Paraquat Dichloride) के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर व जानलेवा दुष्प्रभावों को देखते हुए राज्य सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कीटनाशक निर्माता कंपनियों को इसका उत्पादन और वितरण तत्काल प्रभाव से बंद करने तथा बाजार में मौजूद बचे हुए पूरे स्टॉक को वापस मंगाकर नियमानुसार नष्ट करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा इस कीटनाशक का पंजीकरण रद्द कर देशव्यापी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद राज्य शासन ने इसे मध्य प्रदेश में सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही संबंधित कंपनियों को अपने पंजीकरण प्रमाण पत्र केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति को तुरंत लौटाने के लिए निर्देशित किया गया है।
मजदूरी और समय बचाने के लिए मूंग में अवैध रूप से होता था छिड़काव
बाजार में ग्रामोक्सोन जैसे विभिन्न व्यापारिक नामों से पहचाना जाने वाला पैराक्वेट डाइक्लोराइड मूल रूप से एक तीव्र खरपतवारनाशक है, जो हरे पौधों के संपर्क में आते ही उनकी कोशिकाओं को नष्ट कर तेजी से सुखा देता है। प्रदेश के कई अंचलों में किसान मूंग की कटाई के समय इसका अवैध और खतरनाक इस्तेमाल करते रहे हैं। इस रसायन के छिड़काव से मूंग के हरे पौधे और पत्तियां मात्र 24 से 72 घंटों के भीतर पूरी तरह सूख जाती थीं, जिससे थ्रेशिंग और कटाई में सुगमता होती थी तथा समय व मजदूरी के खर्च की बचत होती थी। हालांकि, मूंग या किसी भी खाद्य फसल की कटाई से ठीक पहले इसका प्रयोग वैधानिक रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित था, फिर भी जल्दी फसल समेटने के फेर में इसका अवैध उपयोग धड़ल्ले से जारी था।
कोई एंटीडोट नहीं: लिवर, किडनी और मस्तिष्क को पहुंचाता है जानलेवा नुकसान
कृषि और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक अत्यंत खतरनाक व विषैला रसायन है, जिसका मानव शरीर पर अपरिवर्तनीय और घातक असर पड़ता है। इसके छिड़काव के दौरान संपर्क में आने या इसके अवशेषों से युक्त अनाज व खाद्य पदार्थों के उपभोग से कैंसर, लिवर सिरोसिस, किडनी फेलियर और मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सबसे भयानक पहलू यह है कि यदि यह रसायन किसी भी प्रकार से शरीर के भीतर चला जाए या गलती से इसका सेवन हो जाए, तो चिकित्सा विज्ञान में इसका कोई एंटीडोट या सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते यह शत-प्रतिशत जानलेवा साबित होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के बाद यदि किसी भी प्रतिष्ठान में इस रसायन का भंडारण या अवैध क्रय-विक्रय पाया गया, तो संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।












