छतरपुर। छतरपुर जिले के प्राथमिक एवं सहायक शिक्षकों का लंबे समय से चला आ रहा क्रमोन्नत वेतनमान का इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। नवागत कलेक्टर मृणाल मीणा के कड़े निर्देशों और मार्गदर्शन में जिला शिक्षा विभाग ने तत्परता दिखाते हुए क्रमोन्नति की पूरी प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा कर लिया है। जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया के विधिवत अनुमोदन के उपरांत जारी आदेश से जिले के 1,223 शिक्षकों को 12, 24, 30 और 35 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिलने जा रहा है। नवरात्रि के पावन पर्व पर आई इस बड़ी सौगात से शिक्षक संघों और कर्मचारी जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।
30 अप्रैल 2026 की स्थिति में पात्र शिक्षकों को मिला लाभ
जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिकृत आदेश के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 की स्थिति में जिन प्राथमिक और सहायक शिक्षकों ने अपनी शासकीय सेवा के 12, 24, 30 अथवा 35 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए थे, उन्हें इस क्रमोन्नति योजना के तहत विधिवत शामिल कर लाभान्वित किया गया है। लंबे अरसे से वित्तीय और सेवा लाभ से वंचित शिक्षकों के लिए यह आदेश बड़ी आर्थिक राहत लेकर आया है।
परामर्शदात्री बैठक में कर्मचारी संघ ने उठाया था मुद्दा
विगत माह कलेक्टर छतरपुर की अध्यक्षता में आयोजित मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों की परामर्शदात्री बैठक में 'मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ' ने शिक्षकों की लंबित क्रमोन्नति का मामला प्रमुखता से उठाया था। कलेक्टर ने प्रकरण की संवेदनशीलता और शिक्षकों की वाजिब मांग को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को समय-सीमा के भीतर तत्काल निराकरण के सख्त निर्देश दिए थे।
विशेष समिति ने पारदर्शी तरीके से किया सेवा अभिलेखों का परीक्षण
कलेक्टर के निर्देश मिलते ही अगस्त 2026 में जिले की कमान संभालने वाले नवागत जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पी. के. रैकवार ने जिले के सभी संकुल प्राचार्यों से अविलंब क्रमोन्नति प्रस्ताव तलब किए। प्रस्तावों के निष्पक्ष, त्रुटिरहित और पारदर्शी परीक्षण के लिए एक विशेष जिला स्तरीय परीक्षण समिति गठित की गई। इस समिति में प्राचार्य जी. डी. अहिरवार (महेबा), प्राचार्य आर. एम. त्रिपाठी (निवारी), प्राचार्य अनिल पटेल, पी. डी. तिवारी एवं विपिन दीक्षित को शामिल किया गया। समिति ने दिन-रात एक कर रिकॉर्ड का सूक्ष्म परीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर बिना किसी प्रशासनिक विलंब के क्रमोन्नति आदेश जारी कर दिए गए।
कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान ही प्राथमिकता
पदभार ग्रहण करने के बाद से ही कर्मचारी हितों को लेकर सक्रिय डीईओ पी. के. रैकवार शिक्षकों और कर्मियों की समस्याओं के त्वरित निपटारे के लिए लगातार 'समस्या निवारण शिविर' भी आयोजित करा रहे हैं। आदेश जारी होने के बाद डीईओ पी. के. रैकवार ने स्पष्ट किया कि जिला शिक्षा कार्यालय की यह सर्वोच्च प्राथमिकता है कि कर्मचारियों की मूलभूत मांगों और वाजिब स्वत्वों का पारदर्शी व समयबद्ध निराकरण हो। शिक्षकों को उनके देय लाभ बिना किसी अनावश्यक रुकावट के समय पर उपलब्ध कराने के लिए विभाग पूरी तरह संकल्पित है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर बहुप्रतीक्षित आदेश जारी होने पर समूचे शिक्षक वर्ग ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।












