सतना, सजल रजक। जिले के मझगवा एसडीएम कोर्ट परिसर के बाहर आदिवासी समाज का भारी आक्रोश देखने को मिला। जयस और जीएसयू संगठनों के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों और महिलाओं ने एसडीएम कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी की। अपनी जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा की मांग को लेकर ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।


2005 से काबिज आदिवासियों को बेदखल करने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इन जमीनों पर खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। आदिवासियों का सीधा आरोप है कि वन विभाग मध्य प्रदेश सरकार की गाइडलाइन का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है, जिसके तहत 2005 से पहले से काबिज आदिवासियों को वन अधिकार देने का नियम है। आरोप है कि अशिक्षित ग्रामीणों को कभी वन नर्सरी तो कभी अवैध कब्जे का बहाना बनाकर उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।


एसडीएम को सौंपा तीसरा ज्ञापन, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

लगातार धरना-प्रदर्शन और रैलियों के क्रम में आदिवासियों ने एसडीएम मझगवा, आईएएस महिपाल सिंह गुर्जर को अपना तीसरा ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य श्रीमती लक्ष्मी देवी मवासी (वार्ड 24) और हीरामन सिंह धुर्वे सहित अन्य प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने केवल कागजी आश्वासन देने के बजाय धरातल पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वे आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन करेंगे।


प्रशासन ने दिया निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा

प्रदर्शन के बीच पहुंचे प्रशासनिक एवं वन विभाग के अधिकारियों ने स्थिति को संभाला। एसडीएम मझगवा, आईएएस महिपाल सिंह गुर्जर ने आदिवासियों को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र और वास्तविक काबिज आदिवासी को परेशान नहीं किया जाएगा। हालांकि, अब देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में कितनी जल्दी और क्या ठोस कदम उठाता है।