दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल में मरीजों के परिजनों से पोछा लगवाए जाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक बड़े 'गुटखा घोटाले' ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनडीटीवी की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि अस्पताल परिसर में तंबाकू नियंत्रण और जुर्माने के नाम पर इलाज कराने आए गरीब तीमारदारों से लंबे समय से अवैध वसूली का संगठित खेल चल रहा था। इस फर्जीवाड़े की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 'मध्य प्रदेश शासन' के नाम से हूबहू फर्जी रसीद बुक छपवाकर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड्स के जरिए सीधे-साधे ग्रामीणों से अवैध रकम ऐंठी जा रही थी, जिसका कोई भी हिसाब-किताब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।


इस अवैध वसूली का ताजा शिकार पड़ोसी जिले सागर से आए एक निर्धन बुजुर्ग राजाराम रजक बने। राजाराम अपने मासूम नाती का उपचार कराने दमोह जिला अस्पताल पहुंचे थे। पीड़ित के अनुसार, उनकी जेब में अनजाने में गुटखे का एक पाउच रह गया था। इसे देखते ही अस्पताल के करीब आधा दर्जन प्राइवेट सुरक्षा गार्ड्स ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर ₹200 जुर्माने की मांग शुरू कर दी। भयभीत बुजुर्ग ने जब गिड़गिड़ाते हुए कहा कि उनकी जेब में घर लौटने के लिए कुल ₹100 ही बचे हैं, तो बेरहम गार्ड्स ने वो अंतिम ₹100 भी छीन लिए और उन्हें हाथ में एक कथित सरकारी रसीद थमा दी।


पीड़ित बुजुर्ग ने जब पूरे घटनाक्रम की आपबीती मीडिया टीम को बताई और कैमरे की पड़ताल शुरू हुई, तो वसूली में शामिल सभी सुरक्षा गार्ड मौके से भाग खड़े हुए। बुजुर्ग को दी गई रसीद का बारीकी से निरीक्षण करने पर फर्जीवाड़े की कलई खुल गई। रसीद पर 'मध्य प्रदेश शासन' का मोनोग्राम और नाम तो अंकित था, लेकिन उसकी छपाई, क्रमांक और प्रारूप पूरी तरह अनधिकृत और फर्जी पाया गया। अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान करने पर सामने आया कि 31 मार्च 2026 के बाद से तंबाकू जुर्माने के मद में एक भी रुपया सरकारी खजाने में जमा नहीं हुआ है, जिससे साफ है कि यह पूरी रकम निजी जेबों में जा रही थी।


घोटाले की परतें खुलने पर जब मीडिया ने अस्पताल अधीक्षक सुरेंद्र सिंह से इस संबंध में सीधे सवाल करने चाहे, तो वे जवाब देने से बचते नजर आए और कैमरे के सामने से भाग निकले। वहीं, अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण नोडल अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह और सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर माना है। सिविल सर्जन डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च के बाद से इस मद में सरकारी खाते में कोई राशि जमा नहीं हुई है। उन्होंने फर्जी रसीद और वसूली तंत्र की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित कर दी है और आश्वासन दिया है कि इस गोरखधंधे में शामिल किसी भी दोषी कर्मचारी या गार्ड को बख्शा नहीं जाएगा।