भोपाल। मध्य प्रदेश से मानसून की औपचारिक विदाई के बाद एक बार फिर मौसम का मिजाज पलटने जा रहा है। मौसम केंद्र भोपाल ने प्रदेश में 15 से 18 अक्टूबर के बीच तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश का चार दिवसीय अलर्ट जारी किया है। उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के संयुक्त प्रभाव के कारण यह मौसमी बदलाव देखने को मिल रहा है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। गुरुवार को ग्वालियर-चंबल अंचल के साथ मालवा के नीमच और मंदसौर में बारिश के आसार हैं, जबकि 16 से 18 अक्टूबर के दौरान यह दायरा बढ़कर उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के जिलों तक फैल सकता है।


ग्वालियर-चंबल समेत 7 जिलों में शुरुआती असर, बाद में बढ़ेगा दायरा

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के सात प्रमुख जिलों—ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, नीमच और मंदसौर में मौसमी गतिविधियों का ज्यादा असर देखने को मिलेगा। यहां गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है। इसके उपरांत 16, 17 और 18 अक्टूबर को इस चक्रवाती सिस्टम का दायरा विस्तृत होगा, जिससे मध्य और पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाएंगे और आंधी-बारिश का दौर शुरू हो सकता है। उल्लेखनीय है कि राज्य से 3 अक्टूबर को ही मानसून पूरी तरह विदा हो चुका है, लेकिन वातावरण में नए सिस्टम सक्रिय होने के कारण बेमौसम बारिश की परिस्थितियां दोबारा बन रही हैं।


दिन में तेज धूप और रात में गुलाबी ठंड का मिला-जुला अहसास

वर्तमान में मध्य प्रदेश में दिन के वक्त चटख धूप खिलने से हल्की तपिश महसूस हो रही है, जबकि रात होते ही पारे में गिरावट के कारण वातावरण में ठंडक घुलने लगी है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पिछले एक दशक के आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि अक्टूबर का महीना हमेशा धूप, गर्मी और हल्की ठंड के मिले-जुले असर वाला रहता है। इस साल भी शुरुआत में मौसम शुष्क और साफ रहा, जिससे दोपहर में उमस व धूप रही और रातें ठंडी दर्ज की गईं। अब आंधी-बारिश की इस नई गतिविधि से दिन और रात के तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है।


इस साल मानसून में सामान्य से 1.6 इंच कम बरसा पानी

मौसम विभाग के मानसूनी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जून से सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में सामान्य से थोड़ी कम बारिश रिकॉर्ड की गई। इस अवधि में पूरे प्रदेश में औसतन 908.4 मिलीमीटर (लगभग 35.8 इंच) बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर (करीब 37.3 इंच) का है। इस तरह कुल वर्षा सामान्य से लगभग 41.1 मिलीमीटर (1.6 इंच) यानी करीब 4 प्रतिशत कम रही। हालांकि, संभागवार आंकड़ों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिला; जहां पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।


पश्चिमी हिस्से में 9 से 51% तक की भारी कमी, पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिले भी सूखे

पश्चिमी मध्य प्रदेश के 20 जिलों में मानसून की भारी बेरुखी रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में बारिश का कोटा 9 से लेकर 51 प्रतिशत तक कम रहा। वहीं दूसरी ओर, भले ही पूर्वी मध्य प्रदेश में कुल मिलाकर 4 प्रतिशत अधिशेष वर्षा दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिले सूखे की मार से पूरी तरह नहीं बच सके और वहां सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी चार दिनों की यह बेमौसम बारिश रबी फसलों की तैयारियों पर असर डाल सकती है।