छतरपुर, संतोष शिवहरे। जिला मुख्यालय सहित आसपास के इलाकों में कथित रूप से अवैध और ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के संचालन को लेकर यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। आरोप है कि बिना पर्याप्त वैध दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ रहे ट्रैक्टरों के खिलाफ जब्ती अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय यातायात पुलिस द्वारा उन पर रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित कर छोड़ दिया जा रहा है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों पर रेत, मिट्टी और गिट्टी सहित अन्य सामग्री से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम आवागमन कर रही हैं। इनमें से कई वाहनों के ओवरलोड होने और आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे भारी वाहनों के अनियंत्रित संचालन से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका बनी रहती है।


मामले को लेकर यातायात प्रभारी बृहस्पति साकेत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई वाहन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो संबंधित कानूनों के तहत उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल वाहन पर नंबर अंकित करने की प्रक्रिया को कार्रवाई का विकल्प नहीं माना जा सकता।


नागरिकों ने सवाल उठाया है कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में परिवहन की जा रही खनिज सामग्री के वैध दस्तावेज और रॉयल्टी आदि की जांच किस स्तर पर की जा रही है। यदि वाहन ओवरलोड हैं अथवा उनके दस्तावेज अधूरे हैं तो उनके खिलाफ कितनी चालानी या जब्ती की कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।


स्थानीय नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक छतरपुर और वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर पारदर्शी और समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ शासन को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान को भी रोका जा सके।


फिलहाल लगाए जा रहे आरोपों पर यातायात पुलिस अथवा यातायात प्रभारी का पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस का पक्ष मिलने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।