नई दिल्ली। थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट (AI2379) मंगलवार को हवा में तेज झटकों यानी टर्बुलेंस (Turbulence) की चपेट में आ गई। उड़ान के दौरान अचानक विमान काफी नीचे आ गया और जोर-जोर से हिलने लगा। हालांकि, पायलटों ने सूझबूझ से स्थिति संभाली और विमान को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंड कराया।


न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, इस घटना में विमान में सवार यात्रियों और क्रू मेंबर्स समेत 12 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें दिल्ली एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर में प्राथमिक उपचार दिया गया। एअर इंडिया के अनुसार सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है।


यात्रियों का अनुभव और घटनास्थल की स्थिति

1.5 घंटे बाद लगे झटके: फ्लाइट में सवार यात्रियों के अनुसार, फुकेट से उड़ान भरने के लगभग डेढ़ घंटे बाद जब अधिकांश यात्री सो रहे थे, तभी अचानक विमान जोर से हिलने लगा।


2-3 मिनट तक अफरा-तफरी: यात्रियों ने बताया कि 2 से 3 मिनट तक झटके इतने तेज थे कि विमान में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में प्लेन की सीलिंग के पैनल में दरारें भी देखी गईं।


जांच शुरू: विमानन प्राधिकरण और एअर इंडिया द्वारा इस घटना की विस्तृत जांच की जा रही है।


क्या होता है टर्बुलेंस और इसकी श्रेणियां?

टर्बुलेंस हवा के बहाव में अचानक आने वाले बदलाव के कारण होता है, जिससे विमान का संतुलन प्रभावित होता है। तीव्रता के आधार पर यह तीन प्रकार का होता है:


हल्का टर्बुलेंस (Light): इसमें विमान केवल 1 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है, जिसका यात्रियों पर कोई खास असर नहीं पड़ता।


मध्यम टर्बुलेंस (Moderate): इसमें विमान 3 से 6 मीटर तक हिलता है, जिससे रखे हुए सामान या पेय पदार्थ गिर सकते हैं।


गंभीर टर्बुलेंस (Severe): इसमें विमान 30 मीटर तक ऊपर-नीचे जा सकता है। इस दौरान सीट बेल न बांधे होने पर यात्री सीट से उछलकर चोटिल हो सकते हैं।


क्या टर्बुलेंस से प्लेन क्रैश हो सकता है?

आधुनिक विमान तकनीक और एडवांस रडार सिस्टम के कारण टर्बुलेंस से क्रैश होने की आशंका न के बराबर होती है। प्लेन का स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह बेहद गंभीर हवा के दबाव को झेल सके। हालांकि, इतिहास में खराब मौसम और टर्बुलेंस के कारण कुछ बड़े हादसे दर्ज हैं:


1994 (यूएस एयर फ्लाइट 1016): अमेरिका में लैंडिंग के दौरान तूफान से पैदा हुए टर्बुलेंस की चपेट में आने से क्रैश हुई, जिसमें 37 लोगों की जान गई थी।


1999 (अमेरिकन एयरलाइंस 1420): खराब मौसम और टर्बुलेंस के कारण रनवे से फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें 11 मौतें हुईं।


2001 (अमेरिकन एयरलाइंस 587): टेकऑफ के ठीक बाद 'वेक टर्बुलेंस' (Wake Turbulence) की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें सवार सभी 260 लोगों की मौत हो गई थी।