गंधवानी (भानु शर्मा)। धार जिले के बाग क्षेत्र के जामला गांव में सामने आई एक मार्मिक घटना ने प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्थित निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के दौरान अचानक आई बाढ़ के बीच जलती चिता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह घटना बताती है कि प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ गलत स्थान पर बनाए गए श्मशान घाट की समस्या ग्रामीणों के लिए हर वर्ष बड़ी परेशानी बन जाती है।


जानकारी के अनुसार जामला निवासी बापूसिंह (लगभग 60-65 वर्ष) पिछले छह से सात महीनों से बीमार थे और उपचाररत थे। बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। परिजन और ग्रामीण उनका अंतिम संस्कार करने गांव के श्मशान घाट पहुंचे थे। चिता को मुखाग्नि दी जा चुकी थी, तभी ऊपरी क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के कारण नाले में अचानक पानी का तेज बहाव आ गया और देखते ही देखते बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। बहते पानी के बीच चिता जलती रही। कुछ देर और पानी बढ़ता तो चिता के बह जाने की आशंका भी बनी हुई थी।


ग्रामीणों का कहना है कि गांव का श्मशान घाट नाले के बहाव वाले क्षेत्र में बना हुआ है, जिसके कारण हर मानसून में अंतिम संस्कार के दौरान जोखिम की स्थिति पैदा हो जाती है। उनका आरोप है कि निर्माण के समय भौगोलिक परिस्थितियों और जल निकासी का उचित आकलन नहीं किया गया, जिससे बरसात के मौसम में यह स्थान पूरी तरह असुरक्षित हो जाता है।


यह घटना केवल एक परिवार के दुख तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में बरती गई लापरवाही की ओर भी इशारा करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस तरह की पीड़ादायक और जोखिमपूर्ण स्थिति का सामना न करना पड़े।