भोपाल, पंकज यादव। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर बुंदेलखंड सहित पूरे प्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत में ही पैदा हुए गंभीर खाद और डीजल संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया है। पटवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब मानसून दस्तक दे रहा है और धरती बुआई के लिए पूरी तरह तैयार है, तब बुंदेलखंड का किसान खेतों में काम करने के बजाय खाद की कतारों में अपनी रातें गुजारने को मजबूर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस कुप्रबंधन को नहीं सुधारा गया, तो इस क्षेत्र के किसानों की कमर पूरी तरह टूट जाएगी।


विशेष रूप से बुंदेलखंड अंचल की दयनीय स्थिति का खाका खींचते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना जिलों का किसान इस समय भीषण मानसिक तनाव और चिंता के दौर से गुजर रहा है। इन जिलों में किसानों को इस बात का सबसे बड़ा डर सता रहा है कि खाद के इंतजार में कहीं बुआई का सही और अनुकूल समय हाथ से न निकल जाए। उन्होंने याद दिलाया कि बुंदेलखंड का किसान वैसे भी हमेशा मौसम की मार, सूखे और दैवीय आपदाओं से लगातार लड़ता आया है, लेकिन इस बार उसे मौसम से पहले सरकार की प्रशासनिक अव्यवस्था और लचर वितरण प्रणाली से जूझना पड़ रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।


पटवारी ने इस गंभीर कृषि संकट पर व्यापक चर्चा करने और इसका तत्काल समाधान निकालने के लिए मुख्यमंत्री से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार के सामने कुछ कड़े और व्यावहारिक सुझाव भी रखे हैं, जिनमें सभी संभागों में किसानों की सहायता के लिए आपातकालीन नियंत्रण कक्षों की स्थापना करना, खाद की कृत्रिम कमी पैदा करने वाले जमाखोरों के खिलाफ एक बड़ा विशेष अभियान चलाना और जिलावार स्टॉक व दैनिक वितरण की रिपोर्ट को सार्वजनिक करना शामिल है। उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत दी कि वे केवल विज्ञापनों और सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों में कृषि विकास के झूठे आंकड़े दिखाने के बजाय स्वयं बुंदेलखंड के प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के बीच जाएं और उनसे सीधा संवाद स्थापित कर जमीनी हकीकत को समझें, क्योंकि आज खेत की मेड़ पर खड़ा असली किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।


सरकार को घेरते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश का जागरूक किसान अब चुप नहीं बैठेगा और वह सरकारी लापरवाहियों व किसानों के प्रति किए जा रहे इस प्रशासनिक अपराध की पूरी सूची तैयार कर रहा है। यह आक्रोश वर्ष 2028 में 'किसान आक्रोश वर्ष' के रूप में पूरी तरह सामने आएगा, जहाँ भाजपा सरकार को किसानों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि क्या कागजी "किसान पुत्र" ने अब अपने ही गृह प्रदेश के अन्नदाताओं की इस दुर्दशा से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है। उन्होंने अंत में कहा कि बुंदेलखंड का किसान अब और सब्र नहीं करेगा; उसे खाद और डीजल की उपलब्धता के साथ-साथ इस जवाबदेही से भाग रही सरकार से सीधा जवाब चाहिए।