भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर एक नए युग की शुरुआत और बड़े संगठनात्मक कायाकल्प के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने नीमच प्रवास के दौरान एक ऐसा तीखा और विस्फोटक बयान दिया है, जिसने न केवल पार्टी के अंदरूनी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पूरे सूबे का सियासी पारा गर्मा दिया है। जीतू पटवारी ने बेहद कड़े और दोटूक लहजे में साफ कर दिया है कि अब यह ढर्रे पर चलने वाली पुरानी कांग्रेस नहीं है, और कुछ बड़े नेताओं के लिए सिर्फ ‘जन्मदिन मनाने’ और इवेंट मैनेजमेंट की राजनीति करने के दिन अब पूरी तरह से लद चुके हैं। उनके इस आक्रामक रुख से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर जवाबदेही और मैदानी सक्रियता को लेकर एक बड़ा और कड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है।
दरअसल, नीमच में आयोजित एक स्थानीय पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी के तेवर बेहद तल्ख, आक्रामक और स्पष्ट नजर आए। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए पार्टी के ही कुछ कथित वरिष्ठ नेताओं और बड़े चेहरों पर सीधा और तीखा वैचारिक प्रहार किया। उन्होंने संगठन की मजबूती और मैदानी सक्रियता पर विशेष जोर देते हुए उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो आम दिनों में जनता या जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच से पूरी तरह गायब रहते हैं और केवल विशेष अवसरों पर ही अपनी राजनैतिक उपस्थिति दर्ज कराते हैं। पटवारी ने करारा तंज कसते हुए कहा कि पार्टी में कुछ नेता ऐसे हैं जो अपने क्षेत्र में केवल ‘जन्मदिन मनाने आते हैं’। इस एक वाक्य ने वहां मौजूद पत्रकारों और राजनैतिक विश्लेषकों को चौंका दिया, क्योंकि यह सीधा उन बड़े चेहरों पर निशाना था जिनकी जमीनी पकड़ कमजोर हो चुकी है और जो अपनी राजनीति को सोशल मीडिया तक ही सीमित रखते हैं।
राजनैतिक गलियारों में जीतू पटवारी के इस बयान के कई गहरे मायने निकाले जा रहे हैं, जो पार्टी के भविष्य की दिशा और दशा तय करेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के जरिए यह साफ संदेश दे दिया गया है कि अब पार्टी में केवल नाम, पुराने रुतबे या रसूख के सहारे पद हथियाने वालों की खैर नहीं होगी। अब हर स्तर पर नेताओं की जवाबदेही तय होगी और उन्हें अपने काम का हिसाब देने के साथ-साथ जनता के बीच अपनी सक्रियता साबित करनी होगी। दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह है कि अब केवल जमीन पर उतरकर संघर्ष करने वाले और जनता के मुद्दों को उठाने वाले असली मैदानी कार्यकर्ताओं को ही संगठन में वास्तविक तवज्जो और बड़ा महत्व मिलेगा, जिससे सालों से उपेक्षित कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा होगा।
इसके साथ ही, जीतू पटवारी की इस टिप्पणी ने यह भी साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में अब 'वीआईपी कल्चर' (VIP Culture) पर पूरी तरह लगाम लगाई जाएगी। ‘गेस्ट अपीयरेंस’ यानी किसी अतिथि की तरह कभी-कभार कार्यक्रमों में आकर चले जाने वाले बड़े नेताओं को अब हाशिए पर धकेला जा सकता है, क्योंकि पार्टी को वर्तमान में ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो हर सुख-दुख में कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर खड़ा रहे। जीतू पटवारी का यह रुख एक तरह से पुराने ढर्रे और आरामपरस्त राजनीति पर सीधा हमला है, जो यह स्पष्ट करता है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अब अपनी कार्यशैली को पूरी तरह बदलकर एक नए और आक्रामक स्वरूप में जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।



