भोपाल। वैश्विक परिस्थितियों और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों के खर्चों पर नियंत्रण लगाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार अब अपर मुख्य सचिव (एसीएस), प्रमुख सचिव, सचिव से लेकर कलेक्टर स्तर तक के अधिकारियों की सरकारी खर्च पर होने वाली यात्राओं और अन्य खर्चों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
नए निर्देशों के तहत भारसाधक सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के प्रदेश से बाहर सरकारी यात्रा नहीं कर सकेंगे। वहीं भारसाधक सचिवों को भी राज्य से बाहर जाने के लिए मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। विभागों को वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता देने और अनावश्यक प्रत्यक्ष बैठकों से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वरिष्ठ अधिकारी अब निजी होटलों में नहीं ठहर सकेंगे। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में प्रवास के दौरान उन्हें आवासीय आयुक्त कार्यालय की व्यवस्थाओं का उपयोग करना होगा। साथ ही सार्वजनिक परिवहन, वाहन पूलिंग और ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने ऊर्जा और ईंधन बचत को लेकर भी कई कदम उठाए हैं। सभी विभागों को अपने भवनों में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग को जैविक और प्राकृतिक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे, जबकि खाद्य विभाग को पीएनजी नेटवर्क विस्तार और डुप्लीकेट एलपीजी कनेक्शनों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इन उपायों से प्रशासनिक खर्चों में कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इससे पहले कई मंत्रियों और विधायकों ने भी ईंधन बचत के लिए अपने वाहन काफिलों में कटौती की थी। अब अधिकारियों के खर्चों पर भी नियंत्रण की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

