छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर से इस वक्त की एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। छतरपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम प्रशांत अग्रवाल ने शासकीय कार्यों और पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने के मामले में सख्त कदम उठाया है। एसडीएम अग्रवाल ने मौजा गठेवरा में पदस्थ पटवारी श्री वीरेन्द्र शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


मिली जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (रा०) न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज (अमल) करने के लिए वरिष्ठ कार्यालय द्वारा निर्देश दिए गए थे। लेकिन पटवारी वीरेन्द्र शुक्ला द्वारा इस आदेश का पालन नहीं किया गया। इस संबंध में नायब तहसीलदार मंडल बृजपुरा द्वारा पटवारी को तीन बार कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी कर जवाब मांगा गया था, परंतु पटवारी द्वारा कोई संतोषप्रद जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस मामले को लेकर आवेदिका द्वारा जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में भी लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं।


फार्मर रजिस्ट्री कार्य में भी पाई गई घोर लापरवाही

इसके अलावा, शासन के एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य 'फार्मर रजिस्ट्री' में भी पटवारी शुक्ला की प्रगति अत्यंत निराशाजनक (न्यून) पाई गई थी। तहसीलदार छतरपुर नगर द्वारा इस संबंध में जारी किए गए नोटिस का भी पटवारी ने न तो कोई जवाब दिया और न ही अपने कार्य में कोई सुधार किया। एसडीएम प्रशांत अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पटवारी का यह कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियमों के विपरीत होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है, जिसके चलते यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।


45 दिनों में चार्जशीट पेश करने के निर्देश; उमेश यादव को मिला प्रभार

निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। पटवारी हल्का गठेवरा का अतिरिक्त प्रभार अस्थाई रूप से पटवारी श्री उमेश यादव को सौंप दिया गया है।निलंबन की अवधि के दौरान श्री शुक्ला का मुख्यालय एसडीएम कार्यालय छतरपुर नियत किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।एसडीएम प्रशांत अग्रवाल ने तहसीलदार छतरपुर नगर को कड़े निर्देश दिए हैं कि निलंबित पटवारी के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) तैयार कर 45 दिनों के भीतर उनके समक्ष अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें।