छतरपुर, शिवेन्द्र शुक्ला। संस्कृति विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय और शंखनाद नाट्य मंच छतरपुर के संयुक्त तत्वावधान में छतरपुर में रंगमंच की कार्यशाला का आयोजन गांधी आश्रम में किया जा रहा है।अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में रुचि रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह एक शानदार अवसर है जिसमें शामिल होकर वे अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। ऑडिशन के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों के लिए कार्यशाला निशुल्क रहेगी।


कार्यशाला संयोजक वरिष्ठ रंगकर्मी शिवेन्द्र शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि छतरपुर जिले में यह पहला अवसर है जब मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय द्वारा पच्चीस दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।इस कार्यशाला में अभ्यर्थियों को रंगमंच और अभिनय से जुड़ी बारीकियों के साथ, भाव भंगिमाएं, बॉडी मूवमेंट, नाटक का मेक अप, मंच सज्जा, नाटक की प्रॉपर्टी, वस्त्र विन्यास आदि के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाएगा।इस कार्यशाला के लिए रंग प्रयोगशाला, मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के द्वारा चयनित युवा रंगकर्मियों के द्वारा होगी जिसमें लक्ष्य अरोड़ा और सुश्री गीता अहिरवार शामिल हैं।ये रंगकर्मी मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित हैं जो फील्ड पर जाकर नए कलाकारों के साथ काम करेंगे।




शंखनाद नाट्य मंच के सचिव सर्वेश खरे ने बताया कि कार्यशाला के लिए अभ्यर्थियों का चयन साक्षात्कार के माध्यम से होगा क्योंकि अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा होने की वजह से और सीमित सीट संख्या होने के कारण चयन का आधार ऑडिशन रखा गया है जो कि रविवार 21 जून को गांधी आश्रम में ही सुबह 10 बजे से 2 बजे तक होगा।


ऑडिशन के लिए सामान्य तैयारी करके आएं अभ्यर्थी


शंखनाद नाट्य मंच के पदाधिकारियों अभिदीप सुहाने,मानस और निशांत ने बताया कि ऑडिशन में सामान्य जानकारी के साथ रंगमंच के प्रति रुझान, नाटकों में काम करने का अनुभव अथवा कला के किसी भी क्षेत्र में थोड़ा दखल होना शामिल होगा।अच्छे ऑडिशन के लिए अभ्यर्थी किसी कहानी, नाटक आदि का मोनोलॉग भी तैयार करके आ सकते हैं अथवा संगीत या गायन प्रतिभा के होने का भी लाभ मिल सकता है।लेकिन ऐसे अभ्यर्थी जो शुरुवात ही करना चाहते हैं वे भी आसानी से शामिल हो सकते हैं।कार्यशाला में आयु वर्ग का कोई बंधन नहीं है और यह कार्यशाला चयनित अभ्यर्थियों के लिए पूर्णत: नि:शुल्क रहेगी।इस कार्यशाला की खास बात यह है कि कार्यशाला प्रस्तुतिपरक है यानि कि थियेटर सीखने के साथ ही समापन पर 25 दिनों में तैयार नाटक का मंचन भी होगा।