उज्जैन, अशोक दायमा। महाष्टमी के अवसर पर उज्जैन में सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा का निर्वहन किया गया। सुबह प्रसिद्ध चौबीस खंबा माता मंदिर में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने माता महामाया और महालाया की पूजा-अर्चना कर मदिरा का भोग लगाया। ढोल-नगाड़ों के साथ शुरू हुई इस पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। परंपरा के अनुसार नगर पूजा का उद्देश्य शहर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने और सुख-समृद्धि की कामना करना है।

राजा विक्रमादित्य के समय से चली आ रही इस परंपरा में जिला कलेक्टर को उज्जैन के राजा के प्रतिनिधि के रूप में नगर पूजा का दायित्व निभाना माना जाता है। पूजा के दौरान एक विशेष कलश में मदिरा भरकर उसके पैंदे में छेद किया जाता है, जिससे यात्रा के दौरान लगातार मदिरा की धारा बहती रहती है। यह धारा शहर के करीब 40 प्रमुख माता और भैरव मंदिरों तक पहुंचाई जाती है।

नगर पूजा की यात्रा सुबह चौबीस खंबा माता मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न मंदिरों से गुजरती है। लगभग 27 किलोमीटर की इस यात्रा में प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और श्रद्धालु पैदल शामिल होते हैं। यात्रा के समापन पर प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ध्वज चढ़ाने की परंपरा है। इस धार्मिक आयोजन का खर्च जिला प्रशासन द्वारा वहन किया जाता है।