छतरपुर, विनोद मिश्रा। बुंदेलखंड की धार्मिक विरासत में मां बगराजन माता का सिद्ध पीठ विशेष स्थान रखता है। छतरपुर से करीब 17 से 22 किलोमीटर दूर गढ़ी मलहरा क्षेत्र के आगे पहाड़ियों में स्थित यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहाड़ी की विशाल प्राकृतिक चट्टान में माता का स्वरूप स्वयं प्रकट हुआ था। करीब 200 से 250 वर्ष पुरानी जनश्रुति से जुड़े इस स्थल पर पहले छोटी मड़िया थी, जो जनसहयोग से अब भव्य मंदिर का रूप ले चुकी है।


मंदिर परिसर में चट्टानों के बीच बनी संकरी सुरंग भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि इस सुरंग से सफलतापूर्वक निकलने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है, हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त जल अर्पित करने, खप्पर रखने और जवारे बोने-विसर्जित करने की परंपरा निभाते हैं। इस दौरान विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री एवं टीकमगढ़ सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार की ओर से मंदिर समिति को टीन शेड भी उपलब्ध कराया गया था। प्राकृतिक चट्टानों, लोककथाओं और गहरी धार्मिक आस्था के कारण मां बगराजन माता का यह सिद्ध पीठ बुंदेलखंड की विशिष्ट धार्मिक पहचान बना हुआ है।