नई दिल्ली। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा रही है। कालका जी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने मां ब्रह्मचारिणी की महिमा बताई। उन्होंने बताया कि देवी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की और ब्रह्मचर्य का पालन किया था।आईएएनएस से बातचीत करते हुए कालका जी मंदिर पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया, "नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी भगवती की उपासना की जाती है। भगवान शिव को वर रूप में प्राप्त करने के लिए भगवती ने कठोर व्रत और ब्रह्मचर्य का पालन किया था। इसलिए भगवती का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से साधक के जीवन में आने वाली समस्त कठिनाईयां दूर हो जाती हैं और देवी का विशेष आशीर्वाद मिलता है।"

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने आगे बताया, "मां ब्रह्मचारिणी के बीज मंत्र का अनुष्ठान करने से भक्तों के रास्ते में आने वाली सभी कठिनाईयां दूर हो जाती हैं। मां ब्रह्मचारिणी हजारों वर्षों तक भगवान शिव की साधना में संलग्न रहीं और भगवान शिव को वर के रूप में प्राप्त किया।"

वहीं, दिल्ली के झंडेवालान मंदिर के पुजारी पंडित केशव जोशी ने नवरात्रि के दूसरे दिन व्रत रखने वाले भक्तों के लिए पूजा की विधि और नियम को बताया। उन्होंने कहा, "आज ब्रह्मचारिणी का द्वितीय दिवस है। मां भगवती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था, इसलिए इनका नाम ब्रह्मचारिणी है। जो लोग ब्रह्मचारिणी की पूजन-ध्यान करते हैं, उनके मनोकामना को भगवती उसी तरह से पूरी करेगी।"

झंडेवालान मंदिर में मां के दर्शन की टाइमिग को बताते हुए पंडित केशव जोशी ने कहा, "तड़के 4 बजे से रात 12:30 बजे तक मंदिर निरंतर खुला रहता है।" झंडेवालान मंदिर में मां के दर्शन करने आईं एक महिला श्रद्धालु ने कहा, "एक समय ऐसा तूफान और बवंडर आया कि हम सोच रहे थे कि हम मंदिर तक कैसे पहुंचेंगे लेकिन मातारानी ने हमें बुलाया था, इसलिए हम सब कुछ होने के बावजूद आए और यह बहुत अच्छा रहा।"

एक अन्य महिला श्रद्धालु ने कहा, "नवरात्रि में मां के दर्शन करने का इंतजार रहता है। मां का रूप देखते ही रहने का मन करता है।" एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "मां सबके कष्ट और संकट को दूर करती हैं। लाखों की संख्या में भक्त मां के दर्शन करने आते हैं। मां की सब पर अपार कृपा है।"