भोपाल, जीतेन्द्र यादव। इंदौर में कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर के पास गांधी प्रतिमा के समीप आज एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। शहर के व्यापारी संघ के सदस्य सरकार की सीलिंग संबंधी नीति के विरोध में शांतिपूर्ण ढंग से बैठे हुए थे। उनके हाथों में कोई नारेबाजी के बैनर नहीं, बल्कि भक्ति और संयम का प्रतीक राम धुन बज रहा था। रघुपति राघव राजा राम की मधुर धुन के साथ व्यापारी संघ के सदस्य सरकार को जागृत करने का प्रयास कर रहे थे। यह प्रदर्शन सामान्य विरोध से अलग था। इसमें आक्रोश की जगह आस्था और अनुशासन झलक रहा था। व्यापारी लंबे समय से सीलिंग के मुद्दे पर अपनी बात रखते आ रहे हैं। उनका मानना है कि इस नीति से उनके व्यवसाय और रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है। आज उन्होंने गांधी प्रतिमा के समीप बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया। राम धुन के सुर पूरे इलाके में गूंज रहे थे और वहां मौजूद लोग भी इस शांत लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन को देखकर रुक रहे थे। व्यापारी संघ के प्रतिनिधि बताते हैं कि वे सरकार से संवाद चाहते हैं और अपनी जायज मांगों को लेकर कोई हिंसक रास्ता अपनाने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने साफ चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी मांगें समय पर पूरी नहीं हुईं तो संघ चरणबद्ध तरीके से आंदोलन तेज करेगा। यह आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप ले सकता है और शहर के व्यापारिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है। आज का यह प्रदर्शन सिर्फ विरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि एक संदेश भी है। व्यापारी राम के नाम पर बैठकर सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं। गांधी प्रतिमा के सामने बैठकर उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते को चुना है। शहर के व्यापारिक समुदाय में इस मुद्दे को लेकर काफी असंतोष है। कई दुकानदार और छोटे व्यापारी इस नीति से परेशान हैं। वे कहते हैं कि सीलिंग संबंधी नियम उनके कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं और इससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। आज का यह राम धुन वाला विरोध प्रदर्शन इसी असंतोष का शांत लेकिन दृढ़ रूप था। अगर सरकार जल्द ध्यान नहीं देती तो व्यापारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर रखा है। इसमें आगे बैठकें, व्यापक स्तर पर प्रदर्शन और अन्य शांतिपूर्ण तरीके शामिल हो सकते हैं। फिलहाल व्यापारी संघ अपने सदस्यों को संगठित रखे हुए है और सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहा है। कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर के पास आज जो नजारा देखने को मिला, वह साफ बता रहा था कि व्यापारी अपनी मांगों को लेकर दृढ़ हैं लेकिन उन्होंने संयम का रास्ता चुना है। राम धुन के सुरों के बीच उनका यह संदेश साफ था – सरकार जागे और व्यापारियों की आवाज सुने। अगर मांगें अधूरी रहीं तो आगे आंदोलन का विस्तार तय है।