पन्ना/अजयगढ़, मोहम्मद मुस्तकीम। अजयगढ़ नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि क्षेत्र में बिना मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय डिग्री और आवश्यक पंजीयन के कथित झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। आरोप है कि कम योग्यता वाले लोग डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं और उपचार के नाम पर मनमानी फीस भी वसूल रहे हैं।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों के पास मरीजों की जांच और उपचार के लिए आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता नहीं है, वे आखिर किसके संरक्षण में क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि अजयगढ़ क्षेत्र में ऐसे कथित अवैध क्लीनिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और कार्रवाई प्रभावी नजर नहीं आ रही।


पैथोलॉजी सेंटरों पर भी उठ रहे सवाल


इलाज के साथ-साथ पैथोलॉजी जांच के नाम पर भी कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर आवश्यक विशेषज्ञ योग्यता और वैधानिक पंजीयन के बिना जांच केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यदि जांच रिपोर्ट गलत या संदिग्ध होती है तो उसके आधार पर होने वाला इलाज भी मरीज के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग को समय-समय पर क्लीनिक और पैथोलॉजी सेंटरों की जांच कर दस्तावेजों, पंजीयन और आवश्यक योग्यता का सत्यापन करना चाहिए। इसके बावजूद नियमित कार्रवाई नहीं होने से विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।


मेडिकल स्टोरों पर भी अनियमित बिक्री के आरोप


इसी बीच कुछ मेडिकल स्टोरों पर नियम विरुद्ध दवाओं की बिक्री को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर प्रतिबंधित दवाओं और कथित नशीले सिरप की बिक्री के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।


स्वास्थ्य विभाग और औषधि प्रशासन से मांग की जा रही है कि मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस, दवाओं के बिल, स्टॉक रजिस्टर और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए।


गरीब और ग्रामीण मरीजों पर सबसे ज्यादा असर


कथित झोलाछाप डॉक्टरों के बढ़ते नेटवर्क का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और गरीब परिवारों पर पड़ने की आशंका है। आरोप है कि कई मरीज सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह लेने के बजाय सीधे निजी क्लीनिकों का रुख कर लेते हैं। यहां उपचार, इंजेक्शन, जांच और दवाओं के नाम पर अलग-अलग राशि वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि बीमारी से अपेक्षित राहत नहीं मिलने पर मरीजों को बाद में बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि बिना वैध डिग्री और पंजीयन के चिकित्सा सेवाएं देने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।


कार्रवाई के आश्वासन के बीच बड़ा सवाल


मामले को लेकर अजयगढ़ खंड चिकित्सा अधिकारी की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि अब सवाल यह है कि कार्रवाई कब शुरू होगी और कितने क्लीनिक एवं पैथोलॉजी सेंटर जांच के दायरे में आएंगे।


यदि संबंधित क्लीनिक और जांच केंद्र नियमों के मुताबिक संचालित हो रहे हैं तो उनके वैध दस्तावेजों और पंजीयन का सत्यापन होना चाहिए। वहीं यदि कोई प्रतिष्ठान नियमों के विपरीत संचालित पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।


फिलहाल अजयगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठ रहे इन सवालों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग केवल शिकायतों और कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर अभियान चलाकर क्षेत्र के क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर और मेडिकल प्रतिष्ठानों की व्यापक जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है।