दतिया। दतिया नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 17 के वार्ड प्रभारी शिवम निचरेले को लेकर सरकारी सेवा के साथ धार्मिक गतिविधियां संचालित करने और शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण के आरोप सामने आए हैं। मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
जानकारी के मुताबिक शिवम निचरेले अनुकंपा नियुक्ति के बाद नगर पालिका में सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। आरोप है कि नौकरी के साथ वे ‘रामेश्वर धाम सरकार’ नाम से धार्मिक गतिविधियां और कथित तौर पर ‘पर्चा दरबार’ संचालित करते हैं। ग्राम भिटौरा के प्रवेश द्वार को भी ‘रामेश्वर धाम सरकार’ के प्रवेश द्वार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
शासकीय जमीन पर निर्माण के आरोप
मामले में मंदिर से लगी वन विभाग की शासकीय भूमि पर बाथरूम, शौचालय और अन्य निर्माण कर जमीन पर कब्जे की कोशिश किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारी ने संबंधित जमीन को सरकारी बताया और कहा कि पिछले कई महीनों से वहां निर्माण गतिविधियां देखी जा रही हैं।
वन विभाग के कर्मचारी के मुताबिक उनके पदस्थ होने से पहले भी वहां किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से कामकाज किए जाने की जानकारी मिली थी। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब पांच महीनों से वह स्वयं भी मौके की स्थिति देख रहे हैं।
हालांकि, जमीन पर वास्तविक अतिक्रमण हुआ है या नहीं और निर्माण किसके द्वारा कराया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
शासकीय जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी सामने आने के बाद दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने CMO और तहसीलदार को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने नियमानुसार शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई की बात भी कही है।
वहीं नगर पालिका CMO की ओर से कर्मचारी की उपस्थिति, कामकाज और वार्ड प्रभारी के रूप में उनकी जिम्मेदारियों को लेकर जानकारी सामने आई है। CMO ने कर्मचारी के स्थायी होने की बात कहते हुए नियमानुसार मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखने की बात कही है।
सरकारी कर्मचारी और धार्मिक दरबार—नियम क्या कहते हैं?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी सेवा में रहते हुए कोई कर्मचारी निजी तौर पर धार्मिक गतिविधियों का संचालन किस सीमा तक कर सकता है और क्या ऐसी गतिविधियों से आय अर्जित करना सेवा नियमों के अनुरूप है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग द्वारा सेवा नियमों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
चुनाव ड्यूटी से जुड़ा वायरल प्रमाण-पत्र भी सवालों में
मामले में एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया है। दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने के बीच शिवम निचरेले से जुड़ा एक चुनावी ड्यूटी का कथित कर्तव्य प्रमाण-पत्र वायरल होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि चुनाव ड्यूटी पर जाने के बजाय गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दीक्षार्थियों को दीक्षा देने और धार्मिक आयोजन में शामिल होने की गतिविधियां की गईं।
इस संबंध में एक वायरल वीडियो का भी हवाला दिया जा रहा है। हालांकि, वायरल प्रमाण-पत्र और वीडियो की प्रामाणिकता तथा चुनाव ड्यूटी से संबंधित वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित निर्वाचन एवं प्रशासनिक अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल पूरा मामला आरोपों, वायरल दस्तावेजों और मौके से सामने आई जानकारी के आधार पर जांच के दायरे में है। एक ओर धार्मिक आस्था और निजी धार्मिक गतिविधियां हैं, तो दूसरी ओर सरकारी सेवा के नियम, चुनावी ड्यूटी और शासकीय भूमि के उपयोग से जुड़े गंभीर सवाल हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक जांच में शासकीय जमीन पर अतिक्रमण, निर्माण, सरकारी कर्मचारी की धार्मिक गतिविधियों, कथित आर्थिक गतिविधियों और चुनाव ड्यूटी से जुड़े आरोपों पर क्या तथ्य सामने आते हैं और दोष पाए जाने की स्थिति में शासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।




