नई दिल्ली, 30 अप्रैल । वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि भारत के प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने पिछले एक दशक में लेनदेन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना की असाधारण वृद्धि दर्ज की है।11 अप्रैल, 2016 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रेगुलेटरी देखरेख में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा लॉन्च किया गया यूपीआई, भारत के डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम की रीढ़ बन गया है।

मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 2 करोड़ ट्रांजैक्शन के मामूली आधार से बढ़कर, इस प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए।

वैल्यू के मामले में भी, यूपीआई का उभार उतना ही शानदार रहा है। ट्रांजैक्शन की वैल्यू, ऑपरेशन के पहले साल में 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 314 लाख करोड़ रुपए हो गई, जो 4,000 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी है।

वॉल्यूम और वैल्यू, दोनों में यह दोहरा विस्तार इस बात को दिखाता है कि यह प्लेटफॉर्म न सिर्फ छोटे रिटेल पेमेंट्स के लिए, बल्कि ज्यादा वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन के लिए भी कितना ज्यादा जरूरी होता जा रहा है।

सरकारी आकलन के अनुसार, यूपीआई के पैमाने, इंटरऑपरेबिलिटी और भरोसे ने भारत को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में एक ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित किया है।

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने यूपीआई को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के तौर पर मान्यता दी है, जिससे ग्लोबल फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।

साल 2025 यूपीआई के विकास के सफर में एक अहम मोड़ साबित हुआ, जब पहली बार मासिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 2,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया।

अगस्त 2025 में, ट्रांजैक्शन 2,001 करोड़ तक पहुंच गए, और यह रफ्तार पूरे साल जारी रही, जिसका नतीजा दिसंबर में 2,163 करोड़ ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड के रूप में सामने आया।

कुल मिलाकर, यूपीआई ने कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान लगभग 22,000 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनका औसत लगभग 60 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रतिदिन रहा। यह यूजर्स के बीच इसकी गहरी पहुंच और व्यापक भरोसे का एक संकेत है।

संस्थागत भागीदारी में भी काफी विस्तार हुआ है। यूपीआई नेटवर्क पर लाइव बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 हो गई है, जिसमें पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं। इस व्यापक भागीदारी से भौगोलिक पहुंच और गहरी हुई है और प्लेटफॉर्म की सुलभता मजबूत हुई है।

डेटा के रुझान इस्तेमाल के तरीकों में एक साफ अंतर दिखाते हैं। कुल लेन-देन की मात्रा में पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है, जिसकी मुख्य वजह ज्यादा बार होने वाले, कम कीमत वाले खुदरा भुगतान हैं।


No

Name

Task

Status

Action

1

xyz

website

working

done

2

abcd

website

working

done

3

mno

website

working

done

4

hijk

website

working

done


खास बात यह है कि इनमें से 86 प्रतिशत लेन-देन 500 रुपए से कम के हैं। दूसरी ओर, पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेन-देन का कुल लेन-देन के मूल्य में 71 प्रतिशत योगदान है।

मंत्रालय ने आगे बताया कि पी2पी भुगतानों के भीतर भी, जहां 59 प्रतिशत लेन-देन 500 रुपए से कम के हैं, वहीं एक बड़ी संख्या में 41 प्रतिशत लेन-देन इस सीमा से ज्यादा के हैं।