मुरैना, देवेन्द्र सिंह राजपूत। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 12 अक्टूबर को आयोजित विशाल विरोध आंदोलन में शामिल होने जा रहे मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुरैना में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। दिल्ली रवाना होने के उद्देश्य से सदर बाजार स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय पर एकत्र हुए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं को शहर के विभिन्न होटलों में ले जाकर नजरबंद किए जाने की बात सामने आई है।
जिला अध्यक्ष व वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बीच पहुंची पुलिस
जानकारी के अनुसार, रविवार रात जिला कांग्रेस कार्यालय में दिल्ली आंदोलन की रूपरेखा और रवानगी की अंतिम तैयारियों को लेकर बैठक चल रही थी। इस दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष, पूर्व जिला अध्यक्ष, वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। इसी बीच स्थानीय पुलिस प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ कार्यालय पहुंचा और घेराबंदी करते हुए नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वाहनों में बैठा लिया।
रात 1 बजे वीडियो जारी कर गंभीर आरोप: 'कमरों के बाहर लगा दिए ताले'
रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 1:00 बजे कांग्रेस पदाधिकारियों ने होटलों के भीतर से वीडियो जारी कर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें और कार्यकर्ताओं को शहर के अलग-अलग होटलों में जबरन रोककर रखा गया है और बाहर निकलने से रोकने के लिए कमरों के दरवाजों पर बाहर से ताले जड़ दिए गए हैं। नेताओं ने इसे लोकतंत्र का हनन और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को कुचलने का प्रयास करार दिया है।
राजनीतिक गलियारों में गरमाई सियासत, सुरक्षा व्यवस्था सख्त
देर रात हुई इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद मुरैना सहित चंबल अंचल के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है। किसी भी संभावित विरोध या हंगामे की आशंका को देखते हुए शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस नेताओं को केवल दिल्ली आंदोलन में पहुंचने से रोकने के लिए ऐहतियातन रोका गया है, और पुलिस प्रशासन हिरासत में लिए गए नेताओं को कब तक रिहा करता है।











