गुवाहाटी। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने सिलचर स्थित असम विश्वविद्यालय के कुलपति राजीव मोहन पंत को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पद छोड़ने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप से केंद्रीय विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासनिक पद की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यूजीसी नियमों के तहत पात्रता मानदंडों और निर्धारित प्रक्रियाओं से संबंधित उल्लंघनों की खबरें सामने आई हैं। एक अधिकारी के अनुसार, उच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर को यह निर्देश जारी कर पंत को कुलपति पद से इस्तीफा देने को कहा।
खबरों के मुताबिक, नियुक्ति को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यूजीसी के निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं किया गया। इस विवाद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की भूमिका को भी जांच के दायरे में ला दिया है क्योंकि केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रमुख की नियुक्ति उच्च शिक्षा संस्थानों को नियंत्रित करने वाले व्यापक नियमों के अंतर्गत आती है।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रदोश किरणनाथ ने कहा कि इस मामले की जानकारी नई दिल्ली स्थित वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। विश्वविद्यालय आगे की कार्रवाई तय करने से पहले केंद्र सरकार से जवाब का इंतजार कर रहा है।
उच्च न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि विवाद के संबंध में कुलपति को पहले से भुगतान किए गए वेतन की वसूली का प्रश्न उठाया गया है। हालांकि, न्यायालय के आदेश और विश्वविद्यालय द्वारा उठाए जाने वाले प्रशासनिक कदमों के सटीक कानूनी निहितार्थ आधिकारिक सूचना और आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वरिष्ठ शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों से संबंधित यूजीसी के नियमों का अनुपालन देशभर के विश्वविद्यालयों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
यह विश्वविद्यालय असम और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों के छात्रों को शिक्षा प्रदान करता है। शीर्ष नेतृत्व में किसी भी बदलाव का असर इसके प्रशासन और चल रही शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। विश्वविद्यालय और संबंधित केंद्रीय अधिकारियों द्वारा अदालत के निर्देशों पर प्रतिक्रिया देने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।















