बिहार। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व राज्यपाल डॉ. द्यानदेव यशवंतराव पाटिल (डॉ. डी.वाई. पाटिल) का महाराष्ट्र के कोल्हापुर में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। राजनीति के साथ-साथ शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है।


संवैधानिक और राजनीतिक सफर

डॉ. डी.वाई. पाटिल का राजनीतिक जीवन मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ा रहा। उन्होंने देश के कई राज्यों में राज्यपाल (Governor) के रूप में अपनी सेवाएं दीं: वे बिहार के राज्यपाल रहे। इसके अलावा उन्होंने त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य भी रहे और राज्य में विभिन्न प्रशासनिक व राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।


शिक्षा जगत में अभूतपूर्व योगदान

राजनीति के अलावा डॉ. डी.वाई. पाटिल को मुख्य रूप से भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए जाना जाता है: उन्होंने प्रसिद्ध 'डी.वाई. पाटिल ग्रुप' की स्थापना में केंद्रीय भूमिका निभाई। इस समूह के अंतर्गत देशभर में कई प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग संस्थान, यूनिवर्सिटीज और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूल स्थापित किए गए, जिससे लाखों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिली।


उनके निधन पर राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों की हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।