सागर, स्वाति सोलंकी । सागर के प्रतिष्ठित दादा दरबार मंदिर में इस वर्ष शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना को लेकर प्रशासनिक नियमों और स्थानीय परंपराओं के बीच टकराव देखने को मिला। जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी प्रशासन और स्थानीय दुर्गा समिति के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के कारण एक चौथाई सदी पुरानी परंपरा खंडित हो गई।
दर्शन की समय-सीमा को लेकर उपजा विवाद
विवाद की मुख्य वजह प्रशासन द्वारा तय की गई वह समयासीमा थी, जिसके तहत रात 9 बजे तक ही झांकी के दर्शन कराने और उसके बाद पंडाल को पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। दुर्गा समिति ने इस आदेश का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों में इस प्रकार की पाबंदियां परंपरा के विपरीत हैं, जबकि इस बार आयोजन से जुड़े सभी प्रबंध पहले ही पूरे किए जा चुके थे।
पार्क में प्रतिमा स्थापित करने पर मजबूर हुई समिति
प्रशासनिक अड़चनों के कारण मंदिर परिसर के भीतर मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना संभव नहीं हो सकी। स्थिति को देखते हुए समिति के सदस्यों ने सूझबूझ और विरोध दर्ज कराते हुए देवी प्रतिमा को मंदिर के पास स्थित एक पार्क में स्थापित किया। इस घटना के बाद से क्षेत्र के धार्मिक आयोजनों में प्रशासन के दखल और व्यवस्थाओं को लेकर नागरिकों के बीच तीखी चर्चाएं हो रही हैं।











