नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर 'प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना' के संशोधित रूप को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पहले चरण में केंद्र सरकार से 100 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मांगी है।'प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) केंद्र सरकार की एक खास योजना है, जिसका मकसद दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को कानूनी मालिकाना हक और प्रॉपर्टी ट्रांसफर का अधिकार देना है।

इस पहल से योग्य निवासी पक्के मालिकाना हक के कागजात पा सकते हैं। अपनी प्रॉपर्टी कानूनी तौर पर बेच सकते हैं और अपनी संपत्ति के बदले बैंक लोन ले सकते हैं।

यह योजना जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, वसीयत या बिक्री के समझौते के जरिए रखी गई प्रॉपर्टी को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त और रजिस्टर्ड मालिकाना हक वाले टाइटल में बदलने में भी मदद करती है।

इससे पहले अप्रैल में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 'प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना' के तहत दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को "जैसी हैं, वैसी हैं" के आधार पर नियमित करने के केंद्र के फैसले का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि संशोधित ढांचे से लेआउट प्लान की पहले से मंज़ूरी लिए बिना 1,531 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि संशोधित नीति के तहत इन कॉलोनियों में मौजूद सभी प्लॉट और इमारतों को रिहायशी प्रॉपर्टी माना जाएगा।

उन्होंने घोषणा की कि तय समय-सीमा के भीतर राजस्व अधिकारियों द्वारा संयुक्त सर्वे किए जाएंगे। योजना के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण का जीआईएस सर्वे सात दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा, कमियों को अगले 15 दिनों में दूर किया जाएगा और 45 दिनों के भीतर कन्वेयंस डीड (स्वामित्व हस्तांतरण विलेख) जारी किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया था कि दिल्ली की 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 511 को तुरंत नियमित करने के लिए चुना गया था।

अप्रैल में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने मंजूरशुदा लेआउट प्लान की पिछली जरूरत को खत्म करते हुए, "जैसी हैं, वैसी हैं" के आधार पर 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा की थी।

इस फैसले को राष्ट्रीय राजधानी में इन बस्तियों में रहने वाले 45 लाख से ज्यादा प्रवासी निवासियों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा गया।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी संकेत दिया था कि सैनिक फार्म और अनंत राम डेयरी समेत 60 से ज्यादा अमीर अनधिकृत कॉलोनियों को भी नियमित करने पर विचार किया जाएगा।

हालांकि, उन्होंने साफ किया था कि इन कॉलोनियों के निवासियों को ज्यादा शुल्क देना होगा, भले ही उन शुल्कों का ढांचा और समय-सीमा अभी तय नहीं की गई थी और उन्होंने कहा, हम ऐसा करेंगे।

संशोधित पॉलिसी से उन लगभग 45 लाख निवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो अनधिकृत कॉलोनियों में रहते हैं। ये कॉलोनियाँ पिछले तीन-चार दशकों में खेती की जमीन पर बसी थीं, जिसकी मुख्य वजह राष्ट्रीय राजधानी में किफायती घरों की कमी और तेजी से होता शहरी विस्तार था।