लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पति की मृत्यु के बाद आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रही महिलाओं को आत्मसम्मान और संबल प्रदान करने में योगी सरकार की ‘पति की मृत्यु उपरान्त निराश्रित महिला पेंशन योजना’ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्य सरकार की इस कल्याणकारी योजना के माध्यम से वर्तमान में उत्तर प्रदेश की 42 लाख से अधिक महिलाओं को नियमित रूप से आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की हर पात्र महिला को प्रति माह 1,000 रुपये की पेंशन राशि दी जा रही है।
पेंशन राशि दोगुनी कर सरकार ने दिया अतिरिक्त संबल
महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने इस पेंशन योजना की राशि में बड़ा इजाफा किया था: वर्ष 2016-17 में इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को महज 500 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाती थी। योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में इस राशि में सीधे 100% की बढ़ोतरी करते हुए इसे 1,000 रुपये प्रति माह कर दिया। महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच यह सहायता महिलाओं के जीवन को सुगम बनाने में बड़ी भूमिका निभा रही है।
आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से पारदर्शिता
योजना के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन के लिए आधुनिक व्यवस्था लागू की गई है: वित्तीय वर्ष 2024-25 से योजना के शत-प्रतिशत लाभार्थियों को 'आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम' से जोड़ दिया गया है, जिससे पेंशन राशि बिना किसी बिचौलिये के सीधे बैंक खातों में पहुंचती है। महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र महिलाओं की पहचान कर आवेदनों का त्वरित निस्तारण किया जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे।
योजना की प्रमुख पात्रता और शर्तें
निराश्रित महिला पेंशन योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित शर्तें तय की गई हैं:
महिला उत्तर प्रदेश की स्थायी निवासी होनी चाहिए।
आवेदिका की न्यूनतम आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
महिला के पति की मृत्यु हो चुकी हो।
परिवार की कुल वार्षिक आय 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

















