रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक और बड़ी राजनीतिक व कानूनी हलचल की खबर सामने आई है। दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने और रामपुर जिला जेल से बाहर आते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने अपनी हिरासत में ले लिया है। जेल के मुख्य द्वार पर रिहाई का इंतजार कर रहे सैकड़ों सपा समर्थकों की खुशियां इस अचानक हुई कार्रवाई से पलभर में विरोध और हंगामे में बदल गईं। हालांकि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इस कार्रवाई के बाद जाने दिया गया है।


रिहाई के कुछ ही मिनटों बाद ED की कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा को निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी। लेकिन शनिवार शाम जैसे ही कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आजम खान ने रामपुर जेल के बाहर कदम रखा, पहले से मुस्तैद ED अधिकारियों की टीम ने उन्हें रोक लिया: यह कार्रवाई जौहर यूनिवर्सिटी और मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच (2019 मामला) के तहत की गई है। ED की टीम ने नया कस्टडी आदेश/वारंट थमाते हुए केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF) और पुलिस की मौजूदगी में आजम खान को अपने वाहन में बैठाया। ED रविवार को उन्हें अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगी।


आजम खान का बयान और समर्थकों का हंगामा

जेल के बाहर हिरासत में लिए जाने के दौरान आजम खान ने पत्रकारों से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर की: उन्होंने कहा, "अब कहने के लिए क्या बचा है? ऐसा लगता है जैसे कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। क्या मुस्लिम होने की यही सजा है? हमारी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम ने यूनिवर्सिटी बनाई और बच्चों के लिए स्कूल बनाए।" गिरफ्तारी की खबर मिलते ही जेल परिसर के बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। स्थिति को संभालने के लिए रामपुर पुलिस और पीएसी (PAC) के जवानों को तैनात किया गया है ताकि शांति व्यवस्था कायम रहे।


रामपुर में गरमाई सियासत, सपा का पलटवार

इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि "आज के हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि जब वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है। बुजुर्ग नेता के खिलाफ राजनीतिक विद्वेष के तहत यह लगातार कायराना कार्रवाई की जा रही है।" दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि स्वतंत्र जांच एजेंसियां (ED) साक्ष्यों और कानून के आधार पर काम कर रही हैं। भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के मामलों में कानून सभी के लिए समान है।