छतरपुर,विनोद मिश्रा। सर्पदंश के बाद समय पर इलाज कराने के बजाय झाड़फूंक के चक्कर में पड़े परिवार की लापरवाही का दर्दनाक नतीजा सामने आया है। सटई निवासी 20 वर्षीय सुमन कुशवाहा की सर्पदंश से मौत हो गई। हैरानी की बात यह रही कि मौत के बाद भी परिजन शव को अस्पताल में छोड़ने के बजाय झाड़फूंक कराने के लिए लेकर भटकते रहे। डॉक्टर और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव को वापस जिला अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार सुमन कुशवाहा अपने पति भूपेंद्र कुशवाहा के साथ रात करीब 2:30 बजे सो रही थी। इसी दौरान जहरीले सर्प ने उसे डस लिया। महिला की चीख सुनकर परिजन जागे, लेकिन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले टीकमगढ़ स्थित एक मंदिर में झाड़फूंक कराने पहुंच गए। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई।
हालत गंभीर होने पर परिजन उसे छतरपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर रवि सोनी ने प्राथमिक उपचार किया और महिला को अस्पताल की चौथी मंजिल पर भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल की नर्स एवं चौथी मंजिल की इंचार्ज गीता चौरसिया के अनुसार, परिजन महिला को मृत अवस्था में वार्ड में लेकर आए थे।
मौत के बाद भी नहीं छोड़ा झाड़फूंक का सहारा
महिला की मौत के बाद भी परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को सूचना दिए बिना शव को दोबारा झाड़फूंक कराने के लिए अजयगढ़ के पास बढ़कोड़ा ले गए। पोस्टमार्टम के लिए शव अस्पताल में नहीं मिलने पर अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। जानकारी जुटाने पर पता चला कि परिजन शव को झाड़फूंक कराने के लिए लेकर गए हैं।
मामले की जानकारी मिलने के बाद डॉक्टरों और पुलिस ने परिजनों से संपर्क किया। हस्तक्षेप के बाद शव को वापस जिला अस्पताल लाया गया, जहां आवश्यक कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम किया गया।
परिजनों ने जहरीले सर्प को भी पकड़कर मार डाला
बताया जा रहा है कि सर्पदंश की घटना के बाद परिजनों ने उस जहरीले सर्प को भी पकड़ लिया और उसे मार डाला। घटना के बाद परिवार में मातम का माहौल है।
समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान!
परिजनों का कहना है कि सर्पदंश के बाद यदि महिला को तत्काल अस्पताल ले जाया जाता और झाड़फूंक में कीमती समय बर्बाद नहीं होता, तो संभव है कि उसकी जान बचाई जा सकती थी। घटना ने एक बार फिर सर्पदंश जैसे आपातकालीन मामलों में अंधविश्वास के बजाय तत्काल चिकित्सकीय उपचार की जरूरत को उजागर किया है।
सर्पदंश में झाड़फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल जरूरी
सर्पदंश की स्थिति में झाड़फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है। सांप के काटने के बाद पीड़ित को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां डॉक्टर की निगरानी में आवश्यक उपचार और एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया जा सके। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से गंभीर स्थिति में भी मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।




