भोपाल। भोपाल के बाहरी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों के तेज विकास के लिए प्रस्तावित 51 किलोमीटर लंबे 'ग्रोथ कॉरिडोर' परियोजना का शुरुआती आंकलन सामने आ गया है। भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) - 2047 के ड्राफ्ट में शामिल इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 3,000 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। इस मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण पर 20 हजार करोड़ रुपये का विशाल बजट खर्च होने का अनुमान है। हालांकि, भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) के सामने इस भारी-भरकम बजट की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
स्मार्ट सिटी जैसे 6 नए शहर बसाने जितनी जमीन पर होगा निर्माण
परियोजना के लिए 3,000 हेक्टेयर भूमि का आंकलन किया गया है, जो टीटी नगर में विकसित स्मार्ट सिटी के 'एबीडी प्रोजेक्ट' जैसे छह अलग-अलग क्षेत्रों के बराबर है। प्रमुख कनेक्टिंग रूट्स के दोनों तरफ 500 मीटर के दायरे में हाई-डेंसिटी डेवलपमेंट किया जाएगा। यहां असीमित एफएआर (FAR) के साथ बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतें, कमर्शियल हब, आईटी पार्क और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की योजना है।
फंड जुटाने के लिए बनेगी नई पॉलिसी; निजी निवेशकों को आगे लाने की तैयारी
बीडीए अब तक आपसी करार वाली 'लैंड पुलिंग पॉलिसी' पर मास्टर प्लान रोड और नगर विकास योजनाएं तय करता आया है, लेकिन इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए नई नीति पर काम किया जाएगा। प्रोजेक्ट की लागत बहुत अधिक होने के कारण निजी निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों का वित्तीय बोझ सीधे सरकारी तंत्र पर न पड़े। स्ट्रक्चरल इंजीनियर शैलेंद्र बागरे के अनुसार, बिना मजबूत और स्पष्ट वित्तीय रूपरेखा के 20 हजार करोड़ रुपये की इस विशाल योजना को समय सीमा के भीतर पूरा करना एक अत्यंत कठिन लक्ष्य होगा।
क्या है 51 किमी लंबा 'ग्रोथ कॉरिडोर'?
51 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर भोपाल एयरपोर्ट, प्रस्तावित एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी (EKAI City), प्रस्तावित सीएमयू (CMU), लॉजिस्टिक्स हब और थोक व्यापार क्षेत्रों को शहर के विभिन्न उपनगरों से जोड़ेगा। कॉरिडोर क्षेत्र में आवासीय और शैक्षणिक संस्थानों के अलावा आईटी और एआई (AI) सेक्टर, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब, लग्जरी होटल, हॉस्पिटैलिटी, मॉल, मल्टीप्लेक्स तथा बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस स्थापित किए जाएंगे।

















