बालाघाट, रीतेश सोनी। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में गहराए पेयजल संकट को लेकर उस वक्त बड़ा सियासी व प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया, जब एक सप्ताह से 50 गांवों की नल-जल सप्लाई ठप होने पर स्थानीय विधायक मधु भगत का गुस्सा फूट पड़ा। त्योहारी सीजन के बीच ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते रहे, लेकिन जल निगम और रियान कंपनी के बीच कर्मचारियों की हड़ताल का गतिरोध जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन 181 और मंत्री प्रह्लाद पटेल की मौजूदगी में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के बावजूद नहीं सुलझ सका। आखिरकार व्यवस्था की इस घोर नाकामी के बीच विधायक खुद मैदान में उतरे। उन्होंने हड़ताली कर्मचारियों का अनशन खत्म कराया, अधिकारियों को जमकर लताड़ा और खुद प्लांट के भीतर जाकर उच्च क्षमता वाली मोटरों के स्विच दबाकर 50 गांवों की जल आपूर्ति बहाल कराई।
त्योहार के बीच एक हफ्ते से बंद थी पानी की सप्लाई, प्लांट पहुंचे विधायक
परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के चांगोटोला और लामता ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले लगभग 50 गांवों में जल निगम की समूह नल-जल योजना के माध्यम से की जाने वाली जलापूर्ति विगत एक सप्ताह से पूरी तरह बंद थी। रियान कंपनी द्वारा संचालित वाटर फिल्टर प्लांट के कर्मचारियों के अपनी लंबित मांगों और वेतन को लेकर हड़ताल पर चले जाने से घरों तक पहुंचने वाला पानी एकाएक बंद हो गया। त्योहार के दिनों में पानी का संकट गहराने से ग्रामीणों में भारी हाहाकार मच गया। कर्मचारियों और कंपनी प्रबंधन के बीच के विवाद का खामियाजा निर्दोष ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधायक मधु भगत सीधे जल निगम के डूटी डैम और देवसर्रा वाटर प्लांट जा पहुंचे।
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'हम यहां क्या आलू छीलने बैठे हैं?'—लापरवाह अधिकारियों की लगाई क्लास
वाटर प्लांट पहुंचकर विधायक ने सबसे पहले अनशन व हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से संवाद किया और उनकी जायज मांगों को सुना। इसके बाद जब उन्होंने जल निगम और रियान कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की, तो अधिकारियों के टालमटोल वाले रवैये पर विधायक का पारा चढ़ गया। उन्होंने फोन पर अधिकारियों को तीखे लहजे में फटकार लगाते हुए कहा कि "हम यहां क्या आलू छीलने बैठे हैं? तुम, तुम्हारे अधिकारी और कंपनी सब डिफॉल्टर हैं। कलेक्टर से भी बात हुई है, विधानसभा में प्रश्न लगाकर सबके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराऊंगा और यहीं आमरण अनशन पर बैठ जाऊंगा।" विधायक के इस कड़े रुख से जिम्मेदार अधिकारियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने दो टूक कहा कि ग्रामीणों को पानी जैसी बुनियादी जरूरत से वंचित रखने वाली घोर लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खुद अपने हाथों से चालू किया वाटर प्लांट, बहाल हुई पेयजल सप्लाई
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब विधायक केवल निर्देश या चेतावनी देकर वापस नहीं लौटे। उन्होंने आंदोलनकारी कर्मचारियों को मनाकर उनका अनशन समाप्त कराया और स्वयं प्लांट के भीतर प्रवेश किया। जिस व्यवस्था को जल निगम, जिला प्रशासन और कंपनी को सुचारू करना चाहिए था, उसके लिए विधायक ने खुद सैकड़ों वोल्ट की बिजली सप्लाई वाले पैनल पर जाकर भारी वाटर मोटरों के स्विच ऑन किए। विधायक के इस त्वरित एक्शन के बाद फिल्टर प्लांट की मोटरें चालू हुईं और पाइपलाइन के जरिए प्रभावित गांवों में पानी की सप्लाई शुरू हो सकी, जिससे ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली।
15 नवंबर तक का अल्टीमेटम, 16 से उग्र आंदोलन और अनशन की चेतावनी
जलापूर्ति तात्कालिक रूप से चालू कराने के बाद विधायक मधु भगत ने जल निगम और रियान कंपनी प्रबंधन को 15 नवंबर तक की अंतिम समय-सीमा (अल्टीमेटम) दी है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कंपनी कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्याओं, उनकी वैधानिक मांगों और प्लांट की तकनीकी व मोटर संबंधी सभी कमियों को 15 तारीख तक दुरुस्त कर ले। यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं निकाला गया, तो 16 नवंबर से वे स्वयं कर्मचारियों और क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ मिलकर जिला प्रशासन, जल निगम और सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन का बिगुल फूंकेंगे और आमरण अनशन पर बैठेंगे। विधायक ने साफ किया कि वे इस पूरे मामले को आगामी विधानसभा सत्र में भी प्रमुखता से उठाएंगे।














