नई दिल्ली। देश में महिला उद्यमिता और रोजगार भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। गुरुवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, लगभग 3.69 करोड़ पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) महिलाओं के स्वामित्व में हैं, जो कुल पंजीकृत एमएसएमई का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा हैं।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) वर्ष 2017-18 के 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है।

देश के 1.07 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है। ऐसे स्टार्टअप्स कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा हैं।

फैक्टशीट के अनुसार, 2025 में भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 20 करोड़ महिलाएं रोजगार में थीं।

बयान में कहा गया है कि यह व्यापक बदलाव महिलाओं को सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा, उद्यमिता, औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी और वित्तीय अवसरों तक अधिक पहुंच प्रदान करने वाली नीतियों के माध्यम से संभव हो रहा है।

महिलाओं का वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (डब्ल्यूपीआर) 2017-18 में 22 प्रतिशत था, जो बढ़कर 2025 में 38.8 प्रतिशत हो गया। 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 20 करोड़ महिलाएं रोजगार में थीं।

जुलाई 2026 तक मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष कार्यबल का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। वहीं, पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में सृजित कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत रही है।

बयान में कहा गया है कि औपचारिक मान्यता, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को और मजबूत बनाने के प्रमुख क्षेत्र हैं।

स्वावलंबन योजना के तहत युवा महिलाओं को बिजनेस आइडिया से लेकर उद्यम की स्थापना तक उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार संबंधी मार्गदर्शन और कानूनी सहयोग प्रदान किया जाता है। चयनित प्रतिभागियों को टिकाऊ उद्यम विकसित करने के लिए 21 सप्ताह तक मेंटरशिप और हैंडहोल्डिंग सहायता भी दी जाती है।

यशस्विनी अभियान ने उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए काम किया है और 2029 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल तथा उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर लैंगिक समानता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

फैक्टशीट के अनुसार, जुलाई 2026 तक यशस्विनी अभियान के माध्यम से 22 लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई का पंजीकरण कराया जा चुका है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 में महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) से कुल सार्वजनिक खरीद 3.8 प्रतिशत रही, जो सरकार के 3 प्रतिशत सार्वजनिक खरीद लक्ष्य से अधिक है।