छतरपुर, विनोद मिश्रा। शहर का ऐतिहासिक ग्वाल मंगरा तालाब इन दिनों बदहाली की स्थिति से गुजर रहा है। कभी शहरवासियों की जरूरतों का प्रमुख जलस्रोत रहा यह तालाब अब अतिक्रमण, गंदगी, जलकुंभी और घरों से निकलने वाले गंदे पानी की चपेट में है। जिला प्रशासन द्वारा तालाब के सौंदर्यीकरण की कवायद शुरू कर पांच मोटर पंपों के जरिए पानी निकालने का काम शुरू कराया गया था, लेकिन बारिश के बाद पानी निकासी का काम बंद हो गया। इसके बाद तालाब में जमा गंदगी और जलकुंभी सड़ने लगी है, जिससे आसपास के रहवासियों को दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है।


स्थानीय निवासी हरिश्चंद्र रावत के अनुसार करीब 50 वर्ष पहले मंदिर के बगल में स्थित ग्वाल मंगरा तालाब बेहद उपयोगी हुआ करता था। लोग तालाब के पानी का इस्तेमाल खाना बनाने सहित अन्य घरेलू कार्यों में करते थे। समय के साथ तालाब में गंदगी बढ़ती गई और आसपास अतिक्रमण भी फैलता गया। वर्तमान में तालाब का पानी पूरी तरह दूषित नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि इसका असर आसपास स्थित कुओं के पानी पर भी पड़ सकता है।


कार्रवाई के बाद फिर बढ़ा अतिक्रमण


स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर तालाब क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई थी। हालांकि कार्रवाई के कुछ समय बाद स्थिति फिर जस की तस हो गई। लोगों का आरोप है कि तालाब की जमीन पर दोबारा अतिक्रमण होने के साथ ही इसका दायरा भी बढ़ गया है। आसपास बने मकानों से निकलने वाला गंदा पानी और मल-मूत्र का पानी तालाब में पहुंचने से इसकी स्थिति लगातार खराब हो रही है।


जलकुंभी सड़ने से दुर्गंध, मच्छरों का खतरा


बारिश के बाद तालाब में जमा पानी, गंदगी और जलकुंभी के सड़ने से आसपास के क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है। रहवासियों का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि घरों में खाना खाना तक मुश्किल हो रहा है। लंबे समय तक सफाई और पानी की निकासी नहीं होने पर मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।


गर्मियों में बढ़ सकती है परेशानी


स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तालाब की सफाई नहीं कराई गई और जलकुंभी हटाने के साथ दूषित पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो गर्मियों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। तालाब के आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध और गंदगी के साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


रामसेतु की तर्ज पर बनी सड़क, सौंदर्यीकरण पर सवाल


नगर पालिका द्वारा तालाब के एक हिस्से में रामसेतु की तर्ज पर सड़क का निर्माण कराया गया है। इससे तालाब के एक किनारे से दूसरे किनारे तक आने-जाने में लोगों को सुविधा मिली है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब के वास्तविक सौंदर्यीकरण और संरक्षण की दिशा में अभी अपेक्षित काम नहीं हुआ है।


स्थानीय लोगों के मुताबिक ग्वाल मंगरा तालाब से होकर निकलने वाला मार्ग कभी शहर का प्रमुख रास्ता हुआ करता था। वर्षों पहले राजनगर रोड की ओर जाने वाले वाहन भी इसी रास्ते से होकर गुजरते थे। समय के साथ बाजार क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण और सड़क के सिकुड़ने से यातायात की समस्या बढ़ती गई।


अब तालाब भी अतिक्रमण और गंदगी की चपेट में है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से तालाब की वास्तविक सीमाओं का सीमांकन कराने, अतिक्रमण हटाने, तालाब में पहुंच रहे गंदे पानी को रोकने, जलकुंभी और गंदगी की सफाई कराने तथा सौंदर्यीकरण का काम जल्द पूरा कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो शहर की इस ऐतिहासिक जलधरोहर का अस्तित्व और अधिक संकट में पड़ सकता है।