जबलपुर। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना को हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी का सामना करना पड़ा है। जबलपुर हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की एक सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर की अवैध रूप से काटी गई राशि वापस न करने पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने निर्देश दिए हैं कि यदि तय समय-सीमा के भीतर पूरी राशि वापस नहीं की गई, तो डीजीपी कैलाश मकवाना सहित 3 वरिष्ठ अधिकारियों को 28 सितंबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर लजवर खानम का है। उनके रिटायरमेंट या सेवाकाल के दौरान विभाग द्वारा ₹17 लाख की अवैध रिकवरी (कटौती) कर ली गई थी। इसे वापस लौटाने के अदालती आदेशों के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक भुगतान नहीं किया गया। जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन और पुलिस विभाग को 4 सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है ताकि पूरी राशि महिला सब-इंस्पेक्टर को लौटाई जा सके।
28 सितंबर को इन 3 अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी के निर्देश
यदि 4 सप्ताह की निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं होता है, तो निम्नलिखित तीन अधिकारियों को 28 सितंबर को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा: कैलाश मकवाना (डीजीपी, मध्य प्रदेश), ममतेश माली (तत्कालीन एसपी, भोपाल), शोभा भाकरिया (पेंशन अधिकारी)
पुलिस महकमे में हलचल
हाईकोर्ट द्वारा प्रदेश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी (DGP) को सीधे तलब किए जाने से पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है: यद्यपि तलब किए जाने का अर्थ सीधे तौर पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत अपने आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं करेगी। हाईकोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभों और पेंशन संबंधी मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी, जो राज्य सरकार और पुलिस विभाग के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।




