मुंबई। बॉलीवुड इंडस्ट्री के वेटरन एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार को निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, उन्हें गोवा के डोना पाउला स्थित उनके निवास पर बेहोशी की अवस्था में पाया गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। शुरुआती जांच में बताया गया कि उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट हुआ था। डॉक्टरों ने अस्पताल लाए जाने के बाद लगभग 45 मिनट तक उन्हें रिवाइव करने की कोशिश की, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। मणिपाल हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया, लगातार 45 मिनट तक सीपीआर के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। एक मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा।


नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को हुआ था। उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था और वे एक मराठी परिवार से आते थे। उनके पिता गजानन (दिनकर) पाटेकर एक टेक्सटाइल पेंटर और बिजनेसमैन थे, जिनका निधन तब हुआ था, जब नाना पाटेकर 28 साल के थे। उनकी मां निर्मला पाटेकर (संजनाबाई पाटेकर) एक गृहिणी थीं, जो 29 जनवरी 2019 को 99 साल की उम्र में निधन तक दिग्गज एक्टर के साथ रहीं। पत्नी नीलकांति पाटेकर एक पूर्व बैंक अधिकारी, अभिनेत्री और थिएटर प्रोफेशनल हैं। दोनों ने 1978 में शादी की थी और बाद में अलग हो गए, हालांकि आधिकारिक तौर पर तलाक नहीं हुआ। उनका एक बेटा मल्हार पाटेकर है, जो एक फिल्ममेकर हैं और नाना साहेब प्रोडक्शन हाउस चलाते हैं। जबकि, दूसरे बेटे दुर्वासा पाटेकर की दो साल की उम्र में बीमारी के कारण निधन हो गया था। नाना पाटेकर ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई के दादर वेस्ट स्थित समर्थ विद्यालय में तीन साल तक की और बाद में मुंबई के सर जेजे इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से कमर्शियल आर्ट में डिप्लोमा किया। फुल टाइम एक्टिंग में आने से पहले उन्होंने कमर्शियल आर्टिस्ट के तौर पर काम किया और जीवन-यापन के लिए फिल्मों के पोस्टर और जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने का काम किया।


मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर ने कहा-अस्पताल में मृत लाए गए थे

गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि अस्पताल आने से पहले ही अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया था। मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने कहा, अभिनेता नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह करीब 4:20 से 4:35 बजे के बीच मृत अवस्था में हमारे अस्पताल लाया गया था। उनकी स्थिति देखते हुए हमने सीपीआर देने की कोशिश की। दरअसल, हमारी टीम गुरुवार सुबह 4:18 बजे उनके घर पहुंच गई थी और वहीं से सीपीआर शुरू कर दिया था क्योंकि वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। सीपीआर देते हुए ही उन्हें अस्पताल लाया गया लेकिन तब तक उनका निधन हो गया था। डॉ. शेखर सालकर ने कहा कि मृत लाए जाने के कारण यह मामला मेडिको-लीगल बन गया था, जिसके बाद पुलिस को इस बात की जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा, पुलिस ने शव को सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया है। पोस्टमॉर्टम होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने नाना पाटेकर के बारे में बात करते हुए कहा, "नाना पाटेकर पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के बहुत बड़े प्रशंसक थे। मनोहर पर्रिकर को लेकर नाना पाटेकर हमेशा बहुत भावुक हो जाते थे। सम्राट समारोह में भी नाना पाटेकर यहां आए थे और उन्होंने मनोहर पर्रिकर के बारे में बहुत सम्मानजनक बात कही थी। यह उनका आखिरी सार्वजनिक भाषण था।


गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को अपना घनिष्ठ मित्र मानते थे

अभिनेता नाना पाटेकर गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को अपना घनिष्ठ मित्र मानते थे। नाना पाटेकर ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें मनोहर पर्रिकर का मित्र होने पर गर्व है। उम्र में छोटे होने के बावजूद नाना पाटेकर पर्रिकर के व्यक्तित्व, उनके ऊंचे कद और सादगीपूर्ण जीवनशैली का बहुत सम्मान करते थे। नाना पाटेकर ने हिंदी फिल्मों के अलावा बड़े पैमाने पर मराठी सिनेमा में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया। मराठी सिनेमा में उन्होंने अप्रतिम योगदान दिया। मराठी सिनेमा से जुड़े लोगों ने भी अपनी संवेदना जताई।


अभिनय का हर कोई दीवाना

नाना के अभिनय का हर कोई दीवाना है। डायलॉग बोलने की उनकी स्टाइल कमाल की थी। उन्होंने अपने अभिनय से हर किरदार को अविस्मरणीय बना दिया।नाना पाटेकर एक सफल अभिनेता के साथ ही लेखक, फिल्म निर्माता व निर्देशक भी थे। उन्होंने 'द कन्फेशन', 'जर्नी', 'कुकू की कुंडली', 'ईथा' और 'शक्ति शालिनी' जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को मुंबई में हुआ था। फिल्म 'अग्निसाक्षी' में उन्होंने 'विश्वनाथ' नामक एक मानसिक रूप से विक्षिप्त, जुनूनी और हिंसक पति का किरदार निभाया था। उनकी अभिनय शैली को दर्शकों ने खूब सराहा। इस फिल्म में बेहतरीन अदाकारी के लिए नाना पाटेकर को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।

नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में ड्रामा फिल्म 'गमन' से हिंदी सिनेमा में एंट्री ली थी। इसके बाद उन्होंने मराठी फिल्मों में भी अभिनय किया। वर्ष 1989 में उन्होंने 'परिंदा' फिल्म से हिंदी सिनेमा में फिर से वापसी की। इस फिल्म में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर का निगेटिव किरदार निभाया था। नाना पाटेकर ने 'प्रहार: द फाइनल अटैक' फिल्म से वर्ष 1994 में निर्देशन में कदम रखा था। अभिनेता नाना पाटेकर को कई फिल्मों में किए गए अभिनय के लिए काफी सराहना भी मिली। वर्ष 1990 में आई 'राजू बन गया जेंटलमैन' फिल्म में नाना पाटेकर ने 'जय' नामक एक दार्शनिक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई थी। उनकी इस अदाकारी के लिए फिल्मफेयर पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए नामांकित किया गया था।

वर्ष 1992 में फिल्म 'अंगार' आई थी। इस फिल्म में उनको सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। इस फिल्म में उन्होंने 'माजिद खान' नामक खतरनाक और क्रूर व्यक्ति की भूमिका निभाई थी। वर्ष 1993 में नाना पाटेकर ने 'तिरंगा' फिल्म में ऐसा किरदार निभाया कि फैंस आज भी खूब सराहते हैं। 'तिरंगा' फिल्म में नाना पाटेकर ने पुलिस इंस्पेक्टर 'शिवाजीराव वाघले' की मुख्य भूमिका निभाई।

वर्ष 1994 में आई 'क्रांतिवीर' फिल्म के लिए नाना पाटेकर को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में उन्होंने मुख्य नायक 'प्रताप नारायण तिलक' की ऐतिहासिक और शक्तिशाली भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में उन्होंने जिस तरह का अभिनय किया, वह अन्य अभिनेताओं से बिल्कुल अलग था। उनके बोलने का अंदाज दिलों में ऐसा उतरा कि आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है।

2005 में आई 'अपहरण' फिल्म में नाना पाटेकर ने 'तबरेज आलम' नामक प्रभावशाली राजनेता और माफिया का निगेटिव किरदार निभाया था। इस फिल्म में उन्होंने ऐसा किरदार निभाया था कि उनको बेस्ट निगेटिव रोल के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। वर्ष 2017 में आई फिल्म 'नटसम्राट' में उनके दमदार अभिनय के लिए नाना पाटेकर को मराठी फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

अभिनेता नाना पाटेकर ने 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी: द म्यूजिकल', 'शक्ति: द पावर', 'वेलकम' और 'राजनीति' जैसी फिल्मों से उन्होंने अपने करियर में सफलता हासिल की। नाना पाटेकर पॉजिटिव, निगेटिव और कॉमिडियन सहित हर रोल में अपने आप को ऐसा ढालते थे कि अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता था कि वे किरदार निभा रहे हैं या सच में ऐसा हो रहा है। उन्होंने बच्चों की फिल्म 'अभय' में भूत का किरदार निभाया था। उनका करियर शानदार रहा और उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री लेने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। नाना पाटेकर को फिल्मों और कला के प्रति उनके समर्पण के लिए पद्म श्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।


क्रिकेट था नाना पाटेकर का पहला प्यार

नाना पाटेकर का भारतीय सिनेमा में बड़ा प्रभाव रहा है। उन्होंने अपने विविधतापूर्ण और उत्कृष्ट अभिनय से हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया। इसके लिए उन्हें जनता और आलोचकों दोनों का प्यार मिला, लेकिन नाना पाटेकर का पहला प्यार सिनेमा नहीं, बल्कि क्रिकेट था। इस बात का जिक्र उन्होंने करीब 11 साल पहले दिए एक इंटरव्यू में किया था। नाना ने कहा था कि वह बचपन में अच्छे क्रिकेटर थे और ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते थे। शिवाजी पार्क में अभ्यास करने वाले बल्लेबाजों के लिए वह गेंदबाजी करते थे। गरीबी की वजह से वह क्रिकेट में आगे नहीं बढ़ पाए। पाटेकर ने कहा था कि भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान मैं टीवी से हटता नहीं था।

उन्होंने कहा था कि क्रिकेट के प्रति रोमांच उनमें आज भी उसी स्तर का है। आज भी 10 दिन के अभ्यास के बाद मैं अच्छी गेंदबाजी कर सकता हूं। पाटेकर ने कहा था कि विराट कोहली मेरे फेवरेट क्रिकेटर हैं, और उनके जल्दी आउट होने पर मेरा खाना खाने का मन नहीं करता। नाना पाटेकर का यह इंटरव्यू इस बात का सबूत है कि उनके निधन से सिर्फ बॉलीवुड गरीब नहीं हुआ है। बल्कि, क्रिकेट ने भी अपना एक रोमांचक फैन खो दिया है।

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुद में हुआ था। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। पद्मश्री से सम्मानित अभिनेता रंगमंच के रास्ते सिनेमा में आए थे। 1978 से 2026 तक एक सशक्त अभिनेता के रूप में सक्रिय रहे नाना पाटेकर के करियर की प्रमुख फिल्मों में सलाम बॉम्बे, परिंदा, तिंरगा, क्रांतिवीर, वजूद, अंकुश, खामोशी, शक्ति, राजनीति, वेलकम का नाम लिया जाता है। वह मराठी फिल्मों में भी सक्रिय रहे। नटसम्राट उनकी बेहद प्रशंसित और सफल मराठी फिल्म रही है। नाना पाटेकर को तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।


जब 'उदय भाई' को एक शो के मिलते थे सिर्फ 50 रुपए

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर का नाम आते ही आंखों के सामने उनकी दमदार आवाज, गुस्से से भरे एक्सप्रेशन और पर्दे पर निभाए गए ऐसे किरदार घूमने लगते हैं, जिन्हें भुलाना आसान नहीं है। कभी उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर बनकर लोगों का दिल जीता तो कभी 'उदय भाई' बनकर अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन, एक दौर ऐसा भी था, जब यही अभिनेता फिल्मों की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था। उस समय नाना पाटेकर को एक शो के लिए सिर्फ 50 रुपए मिलते थे, जबकि उनकी पत्नी नीलकांति पाटेकर बैंक में नौकरी करती थीं और उनकी महीने की सैलरी करीब 2,500 रुपए थी।

नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने थिएटर के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा। उनका शुरुआती दौर आसान नहीं था। एक साधारण परिवार से आने वाले नाना ने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा था, जब उनकी कमाई इतनी कम थी कि गुजारा करना भी चुनौती बन जाता था।

नाना पाटेकर और नीलकांति पाटेकर ने 1978 में शादी की थी। कहा जाता है कि दोनों की शादी भी बेहद सादगी से हुई थी और उस समय शादी का कुल खर्च करीब 750 रुपए आया था। नीलकांति पाटेकर उस समय बैंक में अधिकारी थीं और उनकी मासिक आय करीब 2,500 रुपए थी, जबकि नाना पाटेकर को एक शो के लिए महज 50 रुपए मिला करते थे।

नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन फिल्म 'वेलकम' का उदय शेट्टी यानी उदय भाई का किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। उनकी खास डायलॉग डिलीवरी, गुस्सा और कॉमिक टाइमिंग ने इस किरदार को यादगार बना दिया।

हालांकि, नाना की पहचान सिर्फ एक किरदार तक सीमित नहीं रही। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्नि साक्षी', 'तिरंगा', 'खामोशी: द म्यूजिकल' और 'अब तक छप्पन' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग रंग के किरदार निभाए।

आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार, उनकी आवाज और उनके संवाद हमेशा दर्शकों की यादों में जिंदा रहेंगे। कभी एक शो के लिए 50 रुपए पाने वाला यह कलाकार अपनी मेहनत और हुनर के दम पर सिनेमा में ऐसी पहचान छोड़ गया, जिसे मिटा पाना आसान नहीं है।


क्यों गांव में ही रहते थे नाना पाटेकर, बताई थी मुंबई छोड़ गांव लौटने की वजह

कम लोग जानते हैं कि उनके कई ठिकाने थे लेकिन दिल हमेशा गांव में ही बसता था।नाना पाटेकर मुख्य रूप से मुंबई के अंधेरी में समर्थ नगर लोखंडवाला इलाके में एक साधारण वन बीएचके फ्लैट में रहते थे। इतने बड़े स्टार होने के बाद भी उन्होंने कभी आलीशान जिंदगी को नहीं अपनाया। पुणे के पास खडकवासला में उनका 27 एकड़ में फैला बड़ा फार्महाउस है, जहां वे खेती-बाड़ी भी करते थे। इसके अलावा गोवा के डोना पाउला में भी उनका एक घर था, जहां गुरुवार को कार्डियक अरेस्ट के कारण एक्टर का निधन हो गया। उनका पुश्तैनी गांव महाराष्ट्र के रत्नागिरी में है।

दरअसल, 8 जून 2025 को नाना पाटेकर क्विज आधारित रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति 17' में बतौर गेस्ट बनकर पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने गांव लौटने और मायानगरी मुंबई से दूर रहने की वजह का खुलासा किया था।

शो के होस्ट अमिताभ बच्चन ने नाना पाटेकर से सवाल पूछा था, "आपने जीवन में इतना कुछ हासिल किया, फिर सब कुछ छोड़कर गांव क्यों चले गए?" इस पर नाना पाटेकर ने बड़ी सादगी से जवाब दिया था, "मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं। मैं बस यहां काम करने आता हूं और फिर वापस चला जाता हूं। मैं कभी किसी पार्टी में नहीं गया, न ही शहर में ज्यादा रुका। मैं गांव का हूं और वहीं रहना पसंद करता हूं। मुझे वहां की जिंदगी अच्छी लगती है।"

नाना पाटेकर ने कहा था, "मुझे अपनी मां से जितना चाहिए था, उससे कई गुना ज्यादा मिला है। जरूरतें सीमित रखना बहुत आसान है। मेरे पास एसी नहीं है क्योंकि मुझे उसकी जरूरत नहीं लगती। जैसे शहर में चारों तरफ दीवारें होती हैं, वैसे ही मेरे घर के चारों ओर पहाड़ हैं। पहाड़ों से घिरा हुआ मेरा घर है और मैं वहीं आराम से रहता हूं। मुझे यह बहुत अच्छा लगता है।"

एपिसोड में नाना पाटेकर ने अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की भी तारीफ की थी। शो में एक दर्शक ने जब नाना पाटेकर से पूछा था कि फिल्म 'वजूद' में माधुरी दीक्षित के साथ काम करने का उनका अनुभव कैसा रहा? तो उन्होंने कहा था, "माधुरी दीक्षित के साथ काम करना एक शानदार अनुभव रहा। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं, खूबसूरत हैं, कमाल की डांसर हैं और उनमें वह सब कुछ है जो हर इंसान में होना चाहिए। मैं उन्हें बेहद सम्मान की नजरों से देखता हूं।"

शो में दर्शकों ने नाना पाटेकर से फिल्म 'वजूद' में माधुरी को सुनाई कविता 'कैसे बताऊं मैं तुम्हें' से जुड़ा सवाल भी किया था। तब इस पर मुस्कुराते हुए एक्टर ने जवाब दिया था, "वह कविता जावेद अख्तर ने लिखी थी। यह कविता आज भी मुझे याद है। मैंने यह कविता माधुरी को सुनाई थी, इसलिए यह मेरे लिए भूलना मुश्किल है। आज भी ऐसा लगता है जैसे वह कविता मेरे खून में दौड़ रही हो। जब भी कोई मुझसे उस कविता के बारे में पूछता है, तो काफी सारी यादें दिल में ताजा हो जाती हैं।"


'परिंदा' के अन्ना से 'वेलकम' के उदय शेट्टी तक यादगार रहा सफर

हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक लंबे करियर में कई दमदार किरदार निभाए। उन्होंने कॉमेडी में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनका डायलॉग बोलने का अंदाज और किरदारों में भावनाओं को उतारने की क्षमता ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दी।नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुद-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की और थिएटर से भी जुड़े रहे। उन्होंने 1978 में फिल्म 'गमन' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके अगले साल वह मराठी फिल्म 'सिंहासन' में नजर आए। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं की फिल्मों में काम किया। 'भालू', 'रघु मैना' और 'सावित्री' जैसी मराठी फिल्मों से उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

नाना के करियर में नया मोड़ 1986 में आया, जब उन्होंने एन. चंद्रा की 'अंकुश' में काम किया। फिल्म में उन्होंने आम लोगों की परेशानियों और उनके भीतर के गुस्से को अपने किरदार के जरिए बखूबी तरीके से दिखाया। इसके बाद 'प्रतिघात', 'मोहरे', 'अंधा युद्ध' और 'सलाम बॉम्बे' जैसी फिल्मों ने उन्हें दमदार अभिनेता के तौर पर साबित किया।

1989 में विधु विनोद चोपड़ा की 'परिंदा' नाना के करियर की सबसे अहम फिल्मों में शामिल हुई। इसमें उन्होंने 'अन्ना' नामक खतरनाक अपराधी का किरदार निभाया था। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद 1990 के दशक में 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी: द म्यूजिकल', 'राजू बन गया जेंटलमैन', 'अंगार', 'तिरंगा', 'गुलाम-ए-मुस्तफा', 'यशवंत' और 'कोहराम' जैसी फिल्मों में अभिनय किया।

2004 में आई 'अब तक छप्पन' में नाना ने पुलिस अधिकारी साधु आगाशे की भूमिका निभाई। इसके बाद वह प्रकाश झा की 'अपहरण' में नजर आए। 'टैक्सी नंबर 9211', 'वेलकम', 'राजनीति', 'द अटैक्स ऑफ 26/11' और 'काला' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।

अब तक की फिल्मों में नाना की पहचान एक गंभीर भूमिकाओं की रही लेकिन 2007 की 'वेलकम' ने उन्हें नए अंदाज में पेश किया। फिल्म में उन्होंने उदय शेट्टी का किरदार निभाया और कॉमेडी टाइमिंग से दर्शकों को खूब हंसाया। उदय शेट्टी आज भी हिंदी फिल्मों के यादगार कॉमिक किरदारों में गिना जाता है।

नाना पाटेकर का मराठी सिनेमा से रिश्ता भी हमेशा मजबूत रहा। 'पक पक पकाक', 'देऊल', 'नटसम्राट', 'आपला मानस', 'डॉ. प्रकाश बाबा आमटे: द रियल हीरो', 'यशवंतराव चव्हाण- बखर एका वादालाची' और 'ओले आले' जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया।

नाना ने अभिनय के अलावा निर्देशन में भी हाथ आजमाया। 1991 में उन्होंने 'प्रहार: द फाइनल अटैक' का निर्देशन किया, जो भारतीय सेना और एक अनुशासित कमांडो की कहानी पर आधारित थी। कला और सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। सिनेमा के अलावा नाना पाटेकर सामाजिक कामों से भी जुड़े रहे। वह महाराष्ट्र में किसानों और सूखे से प्रभावित परिवारों की मदद से जुड़े प्रयासों में सक्रिय रहे। निजी जिंदगी को उन्होंने हमेशा मीडिया की चकाचौंध से दूर रखा।