मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। मंदसौर में निजी अस्पतालों की मनमानी और लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। शहर के अनुयोग हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर शव रखकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद आखिरकार प्रदर्शन समाप्त हुआ।

बीमारी छिपाकर लगातार देते रहे सुधार का भरोसा

मामला भावगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम मंगरोला निवासी गोपाल सिंह राजपूत से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक, तबीयत खराब होने पर गोपाल सिंह को 13 अक्टूबर 2026 को मंदसौर के अनुयोग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि पूरे इलाज के दौरान डॉक्टरों ने मरीज की बीमारी और वास्तविक स्थिति को परिजनों से पूरी तरह छिपाकर रखा। डॉक्टर लगातार यह कहते रहे कि मरीज की सेहत में सुधार हो रहा है और सब ठीक है। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर भारी-भरकम राशि भी जमा करवा ली।

डिस्चार्ज के कुछ दिन बाद दोबारा बिगड़ी तबीयत

परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज की हालत में सुधार बताकर उन्हें कुछ समय पहले छुट्टी दे दी थी। घर लौटने के कुछ ही दिनों के भीतर गोपाल सिंह की तबीयत फिर से गंभीर रूप से बिगड़ गई। स्थिति नाजुक होने पर परिजनों ने 28 अक्टूबर को उन्हें दोबारा इसी अनुयोग हॉस्पिटल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान 31 अक्टूबर को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई मौत से परिवार सदमे में आ गया और परिजनों का आक्रोश भड़क उठा।

तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, अस्पताल प्रबंधन ने साधी चुप्पी

पिता की मौत से आहत बेटे यशराज सिंह राजपूत ने मंदसौर के तहसीलदार को लिखित आवेदन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने, सही जानकारी छिपाने और पैसों की वसूली के आरोप लगाए गए हैं। न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद प्रदर्शन शांत हुआ। इस पूरे संवेदनशील मामले में जब मीडिया ने अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानना चाहा, तो उनकी तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।