छतरपुर/नौगांव, कमल यादव। नौगांव बुंदेलखंड क्षेत्र की 122वीं ऐतिहासिक श्रीरामलीला में रविवार रात रावण-बाणासुर संवाद, सीता स्वयंवर और शिवधनुष भंजन की लीला का भावपूर्ण मंचन हुआ। शिवधनुष टूटते ही पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। प्रभु श्रीराम के धनुष उठाने और माता सीता के उन्हें वरमाला पहनाने के दृश्य पर श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर उत्साह जताया। मिथिला नगरी में विवाहोत्सव की खुशियों का दृश्य देखकर दर्शक भावविभोर हो गए।

रावण-बाणासुर संवाद में दिखा अहंकार और पराक्रम

रविवार रात लीला की शुरुआत रावण-बाणासुर संवाद से हुई। दोनों पात्रों के बीच शक्ति, पराक्रम और अहंकार को लेकर हुए संवादों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। रावण के अभिमान और बाणासुर के प्रतिवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शक्ति के साथ विनम्रता न हो तो अहंकार पतन का कारण बन जाता है। इसके बाद मिथिला के राजदरबार का दृश्य सजाया गया। राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर के लिए अनेक राजा और राजकुमार पहुंचे। शिवधनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी गई, लेकिन एक-एक कर आए राजा इसमें असफल रहे।

जनक की व्याकुलता, विश्वामित्र की आज्ञा

शिवधनुष को कोई भी राजा हिला नहीं सका तो राजा जनक व्याकुल हो उठे। उनके करुण भाव और संवादों के माध्यम से योग्य वर न मिलने की चिंता को प्रस्तुत किया गया। इसी बीच महर्षि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम को धनुष उठाने की आज्ञा दी।

गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम सहज भाव से आगे बढ़े और शिवधनुष उठाकर जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाने लगे, धनुष टूट गया। धनुष भंजन की गूंज के साथ मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने प्रभु श्रीराम को वरमाला पहनाई। राम-सीता के मिलन के दृश्य पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर जय सियाराम के उद्घोष किए।

आज श्रीराम विवाहोत्सव और परशुराम आगमन

रामलीला समिति के पुलकित श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार को श्रीराम विवाहोत्सव, पांव पखराई, परशुराम आगमन और लक्ष्मण-परशुराम संवाद के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। श्रीराम और माता सीता के विवाह की लीला में मिथिला में मंगलगीतों, वैवाहिक परंपराओं और उत्सव का वातावरण प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ परशुराम आगमन और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का प्रसंग भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।

समिति अध्यक्ष ने की परिवार सहित पहुंचने की अपील

रामलीला समिति के अध्यक्ष विनोद मेहरोत्रा ने नगरवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परिवार सहित रामलीला देखने पहुंचें और इस ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि नौगांव की श्रीरामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंग समाज को मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने युवाओं और बच्चों से भी रामलीला के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आदर्शों को समझने का आग्रह किया। रामलीला का मंचन प्रतिदिन रात 9 बजे से 12 बजे तक किया जा रहा है। समिति ने श्रद्धालुओं से आयोजन में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।


रामलीला के पात्रों ने जीवंत किए लीला के प्रसंग: श्रीरामलीला के मंच पर रावण के अहंकारपूर्ण व्यक्तित्व को सुनील तिवारी और बाणासुर के ओजस्वी स्वरूप को विशाल मेहरोत्रा ने साकार किया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में जन्मेजय तिवारी और वीर लक्ष्मण के रूप में सिद्धार्थ तिवारी ने दर्शकों का मन मोहा, वहीं माता सीता की भूमिका में आशुतोष नायक ने भावपूर्ण अभिनय किया। राजा जनक के रूप में विकर्षण देव नायक, शतानंद के रूप में पं. नरेश पचौरी और महर्षि विश्वामित्र के रूप में सत्यम तिवारी ने प्रसंग को प्रभावशाली बनाया। साधुराजा की भूमिकाओं में मानव तिवारी, प्रमोद उपाध्याय, सर्वेश चौबे, पुष्पेंद्र चौबे, गौरव दीक्षित और ईशु गुप्ता ने सहभागिता की। दुष्ट राजाओं के रूप में कृष्ण मुरारी नामदेव, विनीत सोनी, संतोष शाक्य, वीरू साहू, अवध बिहारी, आनंद शुक्ला, तरुण साहू और अंकित जैन ने मंचन को गति दी। मंत्री धीरेंद्र रेजा, चौबदार हरि सोनी, सुमति के रूप में विनीत विश्वकर्मा, विमति के रूप में सचिन गुप्ता और सुनयना के रूप में हिमांचल मिश्रा ने भी अपने पात्रों को सजीवता प्रदान की। सहेलियों की भूमिका में गौरव जोशी सहित अन्य कलाकारों ने प्रसंग की शोभा बढ़ाई। कलाकारों के अभिनय, संवाद और भावाभिव्यक्ति से रामलीला का वातावरण भक्तिमय और जीवंत हो उठा।