बालाघाट, रितेश सोनी: राजनीति में अक्सर चुनावी जीत को जनाधार और सत्ता को सक्रियता का पैमाना माना जाता है, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जिनकी राजनीतिक यात्रा केवल सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं रहती। चुनावी पराजय के बाद भी क्षेत्र की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर सक्रिय रहना उनकी पहचान होती है। वारासिवनी–खैरलांजी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व खनिज मंत्री प्रदीप अमृतलाल जायसवाल उर्फ 'गुड्डा भैया' की मौजूदा राजनीतिक सक्रियता कुछ इसी तरह की है, जो हाल ही में हुए एक महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के भूमिपूजन के साथ चर्चा के केंद्र में आ गई है।

तीन दशक का सियासी सफर: कांग्रेस से निर्दलीय और भाजपा तक का उतार-चढ़ाव

प्रदीप जायसवाल की राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प और संघर्षपूर्ण रही है। उन्होंने वर्ष 1998 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। इसके बाद 2003 और 2008 में भी जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना। वर्ष 2013 में भाजपा प्रत्याशी डॉ. योगेंद्र निर्मल से शिकस्त मिलने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र से दूरी नहीं बनाई।

इसके बाद आया वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव, जो उनकी सियासी पारी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। टिकट कटने के बाद उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया और 57,783 वोट पाकर शानदार जीत दर्ज की। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में समर्थन देने के बाद वे खनिज विभाग के कैबिनेट मंत्री बने। राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद वे भाजपा में शामिल हुए और वर्ष 2020 में उन्हें राज्य खनिज निगम का अध्यक्ष बनाया गया। वहीं, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में वे कांग्रेस प्रत्याशी विवेक विक्की पटेल से महज 1,003 वोटों के बेहद करीबी अंतर से चुनाव हार गए थे।

पद नहीं, क्षेत्र का विकास है प्राथमिकता: 3.52 करोड़ की सड़क से मिलेगी राहत

चुनाव हारने के बाद भी गुड्डा जायसवाल की सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है। हाल ही में उनके अथक प्रयासों से स्वीकृत ग्राम पंचायत साकड़ी के पांचोटोला से डांगोरलीघाट होते हुए महाराष्ट्र की सीमा को जोड़ने वाले मार्ग का भूमिपूजन संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्वीकृत 3 करोड़ 52 लाख रुपये की लागत से बनने वाली यह 2.7 किलोमीटर लंबी और 5.5 मीटर चौड़ी सीमेंट कंक्रीट सड़क क्षेत्र के लिए बड़ी सौगात है।

इस सड़क के निर्माण से गोंदिया जाने वाले यात्रियों का करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा बचेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। इसके अलावा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, विद्यार्थियों को आवागमन में आसानी होगी और मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र के बीच सीमावर्ती गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

जनप्रतिनिधि न होने के बावजूद जनता के बीच मौजूदगी

आज वारासिवनी विधानसभा का प्रतिनिधित्व भले ही कांग्रेस के पास हो, लेकिन पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल की लगातार सक्रियता यह साबित करती है कि उनके लिए जनसेवा और क्षेत्र का विकास किसी भी पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री से लगातार पत्राचार व मुलाकातों के जरिए इस सड़क की स्वीकृति कराना उनकी कार्यशैली को दर्शाता है।

राजनीति में स्थायी पहचान केवल पद से नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों से तय होती है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वीकृत यह महत्वपूर्ण सड़क निर्माण गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरा हो, जिससे आम जनता को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।