नई दिल्ली। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष चुनाव के माध्यम से सत्ता में आने में सक्षम नहीं है, इसलिए देश में अराजकता और हिंसा का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा की ओर से निकाली जा रही 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्राओं को लेकर उन्होंने कहा कि इन यात्राओं के जरिए जनता को विपक्ष की राजनीति और उसके कथित इरादों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने आरक्षण और एसआईआर विरोध प्रदर्शनों पर आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले की टिप्पणियों का समर्थन किया। इसके अलावा, पंजाब में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली, असम में बहुविवाह विरोधी कानून, सीआरपीएफ के रिकॉर्ड और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने संबंधी बयान पर भी प्रतिक्रिया दी।भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैलियों पर नरेश बंसल ने कहा कि पिछले दो-तीन महीनों में देश ने जंतर-मंतर, प्रधानमंत्री आवास और सुप्रीम कोर्ट के आसपास कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की गतिविधियां देखी हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों की भाषा और शैली से यह स्पष्ट होता है कि विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं रखता। चुनाव के जरिए सत्ता में नहीं आने की स्थिति में विपक्ष अराजकता और हिंसा का सहारा लेना चाहता है। भाजपा के मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता पदयात्राओं के माध्यम से जनता तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का लोकतंत्र सुरक्षित है। जनता को यह समझाने की जरूरत है कि देश के हित में कौन काम कर रहा है और कौन कथित तौर पर देश विरोधी ताकतों के साथ खड़ा है।
कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उन्होंने 1975 में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय लाखों लोगों को जेल में डाला गया, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए संविधान में संशोधन कराया, संसद का कार्यकाल बढ़ाया और नागरिकों के मूलभूत अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए। लोकतंत्र का वास्तविक हरण उस समय हुआ था। बंसल ने विपक्ष के बांग्लादेश और नेपाल से प्रेरणा लेने संबंधी बयानों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता हासिल करने के बजाय हिंसा और अराजकता के जरिए राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं।
आरक्षण और एसआईआर के विरोध प्रदर्शनों पर आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले की टिप्पणियों को लेकर बंसल ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान इसलिए किया गया था, क्योंकि समाज के कुछ वर्गों को सदियों तक समानता का व्यवहार नहीं मिला। पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। जब तक समानता का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।
उन्होंने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय वह स्वयं आंदोलन से जुड़े थे। उस आंदोलन में लोग अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखते थे और लाठी-गोली सहने के बावजूद अराजकता का माहौल नहीं बनाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज विपक्ष के प्रदर्शनों में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।
पंजाब में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली पर प्रतिक्रिया देते हुए बंसल ने कहा कि कांग्रेस 1984 के दंगों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अब तक उन दंगों के लिए देश और पंजाब के लोगों से माफी नहीं मांगी है। ऐसे समय में पंजाब में रैली करना पीड़ितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। चुनाव में कांग्रेस की कोई संभावना नहीं है।
राहुल गांधी की राजनीतिक सक्रियता पर टिप्पणी करते हुए बंसल ने उन्हें 'पार्ट टाइम पॉलिटिशियन' बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी महीने में जितने दिन भारत में अपने आंदोलनों के लिए रहते हैं, उतने ही दिन विदेश में बिताना भी उनके लिए जरूरी होता है।
चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म-6 से एसआईआर का कॉलम हटाए जाने के सवाल पर बंसल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है और वह निर्धारित शर्तें पूरी करता है, तो उसे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वाने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी योग्य व्यक्ति का वोट नहीं छूटना चाहिए।
असम में दो शादी करने पर सरकारी नौकरी जाने से जुड़े कानून का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुविवाह प्रथा के खिलाफ बनाया गया कानून है और वह इसका स्वागत करते हैं।
सीआरपीएफ द्वारा 47 वर्षों में पहली बार लगातार 12 महीनों तक शून्य ऑपरेशनल कैजुअल्टी का रिकॉर्ड बनाने पर बंसल ने बल के जवानों और अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ एक प्रशिक्षित और ऊंचे मनोबल वाला पैरामिलिट्री बल है। जवानों की सूझ-बूझ, बहादुरी, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और उचित नीति के पालन के कारण विभिन्न अभियानों के दौरान पूरे वर्ष कोई ऑपरेशनल कैजुअल्टी नहीं हुई। उन्होंने इसे बल के अधिकारियों और जवानों की बड़ी उपलब्धि बताया।
अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने संबंधी बयान पर बंसल ने कहा कि इसका जवाब चुनाव के मैदान में मिल जाएगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर सनातन का विरोध करने और कारसेवकों पर गोलियां चलवाने का आरोप लगाया। बंसल ने कहा कि राम मंदिर बनाने के लिए लोगों ने संघर्ष किया और गोलियां खाईं। उत्तर प्रदेश की जनता राम मंदिर बनाने वालों का समर्थन करेगी और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा।

















