छतरपुर, संतोष शिवहरे। जल संसाधन विभाग मंडल छतरपुर में सूचना के अधिकार अधिनियम की उड़ रही धज्जियां और मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पीडि़त विवेक कुमार निगम द्वारा आरटीआई के तहत प्रस्तुत दो अलग-अलग आवेदनों के संदर्भ में दायर प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान लोक सूचना अधिकारी पर घोर प्रक्रियात्मक अनियमितताओं, भ्रामक व विरोधाभासी पत्र जारी करने और मानसिक प्रताडऩा के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर आवेदक ने अधीक्षण यंत्री एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी को एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपकर दबाव में लिए गए सम्मति पत्र को निरस्त करने और अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता विवेक निगम में बताया गया है कि अधीक्षण यंत्री कार्यालय द्वारा जारी पूर्व पत्र में दोनों आवेदनों के एवज में संयुक्त रूप से कुल 2500 रुपये शुल्क की मांग की गई थी, लेकिन बाद में कार्यपालन यंत्री कार्यालय द्वारा जारी पत्रों में पूरा गणित ही बदल दिया गया। एक आवेदन का शुल्क अकेले 2500 रुपये और दूसरे का 912 रुपये अलग से मांगते हुए विरोधाभासी आंकड़े पेश किए गए। प्रार्थी का आरोप है कि आरटीआई कानून का मजाक बनाते हुए जानबूझकर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे उसका गंभीर मानसिक उत्पीडऩ हुआ है। साथ ही वैधानिक 30 दिन की समय-सीमा निकलने के कारण आरटीआई की धारा 7(6) के तहत संपूर्ण जानकारी नि:शुल्क पाने का अधिकार है।

आवेदक ने सुनवाई के दौरान मानसिक दबाव में पूर्व से तैयार कथित सहमति पत्र पर जबरन हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगाया है और उसे शून्य घोषित करने की मांग की है। इसके अलावा विभाग द्वारा स्वयं का लिफाफा और डाक टिकट लाने की अवैध मांग किए जाने का भी जिक्र किया गया है। रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका जताते हुए आवेदक ने आरटीआई अधिनियम की धारा 2 के तहत मूल दस्तावेजों के स्वयं निरीक्षण के लिए तिथि निर्धारित करने, नि:शुल्क प्रतियां उपलब्ध कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध धारा 20 के तहत राज्य सूचना आयोग को प्रकरण प्रेषित करने की मांग उठाई है। मांगें पूरी न होने पर लोकायुक्त और राज्य सूचना आयोग में आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है।