मुंबई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) के लिए केवाईसी संबंधी नियमों में ढील दी है। इसके तहत वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के नियमों का अनुपालन करने वाले देशों में रहने वाले पात्र विदेशी निवेशक भारत में शारीरिक रूप से उपस्थित हुए बिना डिजिटल माध्यम से केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।संशोधित ढांचा तीन दिसंबर से लागू होगा। इसका उद्देश्य अनिवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) और विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय वित्तीय बाजारों में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

हालांकि, एफएटीएफ के नियमों का अनुपालन नहीं करने वाले देशों में रहने वाले निवेशकों पर केवाईसी की मौजूदा आवश्यकताएं लागू रहेंगी।

इस कदम से निवेशकों को जोड़ने की प्रक्रिया सरल होने और भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

नए नियमों के तहत बाजार मध्यस्थों को पात्र ग्राहकों से डिजिटल माध्यमों के जरिए केवाईसी संबंधी जानकारी और सहायक दस्तावेज स्वीकार करने की अनुमति होगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार के तहत सेबी ने केवाईसी रिकॉर्ड को अलग-अलग बाजार मध्यस्थों के बीच इस्तेमाल करने की सुविधा भी दी है।

इससे निवेशक एक मध्यस्थ के पास उपलब्ध अपने केवाईसी रिकॉर्ड का इस्तेमाल दूसरे मध्यस्थ के साथ लेनदेन के लिए भी कर सकेंगे, भले ही केवाईसी से जुड़ी सभी व्यक्तिगत जानकारियों का सत्यापन नहीं हुआ हो।

नियामक ने मध्यस्थों को किसी अन्य सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ या किसी अन्य वित्तीय क्षेत्र के नियामक द्वारा विनियमित संस्था की ओर से किए गए केवाईसी पर भरोसा करने की भी अनुमति दी है।

इसके लिए केवाईसी पंजीकरण एजेंसियों (केआरए) या केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री में उपलब्ध रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

संशोधित ढांचे के तहत विदेशी निवेशकों को अपने पासपोर्ट की प्रतियां और जहां लागू हो, वहां ओसीआई कार्ड की प्रतियां जमा करनी होंगी।

सेबी ने पते के प्रमाण के रूप में विदेश में रहने के पते को भी स्वीकार करने की अनुमति दी है। ग्राहकों को केवाईसी फॉर्म डिजिटल या भौतिक, दोनों में से किसी भी माध्यम से जमा करने का विकल्प मिलेगा। नमूना हस्ताक्षर भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दिए जा सकेंगे, हालांकि वीडियो आधारित व्यक्तिगत सत्यापन के दौरान उनका सत्यापन करना होगा।

सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए बाजार नियामक ने वीडियो सत्यापन के दौरान एक अधिकृत अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य की है। साथ ही, इस प्रक्रिया का समवर्ती ऑडिट भी करना होगा।

नियामक ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों की उचित जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) की अंतिम जिम्मेदारी बाजार मध्यस्थों की ही होगी। उन्हें निवेशकों की जोखिम प्रोफाइल के आधार पर अतिरिक्त सत्यापन उपाय भी करने होंगे।

नए नियमों के तहत बाजार मध्यस्थों को केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के तीन कार्यदिवस के भीतर संबंधित रिकॉर्ड केआरए पर अपलोड करने होंगे।

संशोधित प्रावधान एफएटीएफ के नियमों का अनुपालन करने वाले देशों में रहने वाले मौजूदा ग्राहकों की दोबारा केवाईसी (री-केवाईसी) प्रक्रिया पर भी लागू होंगे।