मुंबई। अभिनेत्री नंदिता दास ने अपने करियर में हमेशा ऐसे किरदार और कहानियां चुनी हैं, जो समाज के कई जरूरी मुद्दों पर भी बात करती हैं। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में काम किया और अपनी संजीदा अदाकारी से अलग पहचान बनाई। हालांकि, नंदिता की दिलचस्पी सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और फिल्म 'फिराक' बनाई, लेकिन पहली ही फिल्म के बाद उनका अनुभव इतना निराशाजनक रहा कि उन्होंने दोबारा फिल्म न बनाने की कसम तक खा ली थी। उन्हें लगा था कि शायद निर्देशन उनके लिए नहीं है। हालांकि, कुछ साल बाद एक लेखक की जिंदगी और उसकी कहानियों ने उनके अंदर फिर से फिल्म बनाने का हौसला जगाया। यह लेखक थे सआदत हसन मंटो, जिनकी जिंदगी पर नंदिता ने बाद में फिल्म बनाई।
नंदिता दास ने साल 2008 में फिल्म 'फिराक' से फीचर फिल्म निर्देशन की शुरुआत की थी। यह फिल्म 2002 के गुजरात दंगों के बाद के हालात और आम लोगों की जिंदगी पर आधारित थी। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, परेश रावल, संजय सूरी, दीप्ति नवल और खुद नंदिता दास जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्म में दंगों के बाद लोगों के मन में बैठा डर, आपसी अविश्वास और रिश्तों में आई दूरी दिखाई गई थी। कहानी गंभीर थी और इसे बनाने के लिए नंदिता ने काफी मेहनत की थी, लेकिन फिल्म को जिस तरह की रिलीज और दर्शकों तक पहुंच मिलने की उम्मीद थी, वैसा नहीं हो पाया।
नंदिता ने बाद में कई इंटरव्यू में बताया कि 'फिराक' की खराब डिस्ट्रीब्यूशन से वह काफी निराश हुई थीं। फिल्म बनाने में जितनी मेहनत और समय लगाया था, उसके मुकाबले उसे दर्शकों तक पहुंचाने का मौका नहीं मिला। इसी अनुभव ने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि फिल्म के बाद उन्होंने कसम खा ली थी कि अब वह दूसरी फिल्म नहीं बनाएंगी।
हालांकि, नंदिता का फिल्मों से जुड़ाव खत्म नहीं हुआ था। वह अभिनय करती रहीं और दूसरी गतिविधियों में भी व्यस्त रहीं। इसी बीच साल 2012 में उर्दू लेखक सआदत हसन मंटो की जिंदगी और लेखन पर फिर से चर्चा होने लगी। मंटो की 100वीं जयंती के मौके पर उनके लेखन और विचारों को लेकर कई कार्यक्रम और चर्चाएं हुईं। नंदिता ने मंटो के लेख, कहानियां और उनके जीवन से जुड़ी सामग्री पढ़नी शुरू की। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि मंटो की जिंदगी और उनका नजरिया आज के समाज को समझने के लिए भी बेहद जरूरी है।
नंदिता ने मंटो के विचारों से जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने तय किया कि मंटो की जिंदगी पर फिल्म बनानी चाहिए, लेकिन इस बार वह जल्दबाजी नहीं करना चाहती थीं। फिल्म की तैयारी और रिसर्च में उन्हें करीब पांच साल लगे। उन्होंने मंटो के परिवार के सदस्यों से बातचीत की, उनके जीवन से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाई और उन जगहों को भी देखा, जहां लेखक ने अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बिताया था।
साल 2018 में उनकी फिल्म 'मंटो' रिलीज हुई, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने सआदत हसन मंटो की भूमिका निभाई। फिल्म में रसिका दुग्गल ने मंटो की पत्नी सफिया का किरदार निभाया था। इसके अलावा, ताहिर राज भसीन और ऋषि कपूर जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए। फिल्म का प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ था।
'फिराक' और 'मंटो' के बीच करीब 10 साल का अंतर रहा, लेकिन इस दौरान नंदिता ने खुद को सिर्फ निर्देशन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अभिनय किया, लेखन किया और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठाई। इसके बाद उन्होंने 'ज्विगाटो' का निर्देशन किया, जिसमें कपिल शर्मा और शाहाना गोस्वामी नजर आए। यह फिल्म गिग इकोनॉमी और डिलीवरी वर्कर्स की मुश्किलों पर आधारित थी।
















