चेन्नई। तमिलनाडु के सहकारिता विभाग ने सहकारी बैंकों और समितियों की ओर से दिए जाने वाले गोल्ड लोन की सीमा बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति ग्राम कर दी है। पहले यह सीमा 7,000 रुपये प्रति ग्राम थी। सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए संस्थागत ऋण को अधिक सुलभ बनाना और उन्हें निजी साहूकारों तथा गिरवी रखने वाले कारोबारियों पर निर्भरता से बचाना है।
यह बदलाव राज्य सरकार द्वारा ‘थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ योजना शुरू किए जाने के करीब एक सप्ताह बाद किया गया है। इस योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों को 22 कैरेट सोने की एक ग्राम की अंगूठी दी जाती है।
सरकारी अस्पतालों में हर साल औसतन करीब 4.4 लाख प्रसव होते हैं। ऐसे में इस योजना के तहत हर साल लगभग 441 किलोग्राम सोना बाजार में आने की संभावना है।
अधिकारियों के मुताबिक, गोल्ड लोन की सीमा बढ़ाने का उद्देश्य लोगों को सहकारी संस्थानों से कर्ज लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे उन्हें गिरवी रखे गए सोने के बदले पहले की तुलना में अधिक ऋण मिल सकेगा।
पहले सहकारी बैंक और समितियां गिरवी रखे गए आभूषणों की कीमत का 75 प्रतिशत तक ऋण देती थीं, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 7,000 रुपये प्रति ग्राम थी। छह महीने के भीतर चुकाए जाने वाले ऋण के मामले में मासिक औसत सोने के मूल्य का 75 प्रतिशत तक कर्ज देने की अनुमति थी और इसमें प्रति ग्राम की कोई सीमा नहीं थी।
नई सीमा के बाद सहकारी संस्थानों की ओर से दिए जाने वाले गोल्ड लोन की राशि अन्य ऋणदाताओं के करीब आ गई है। सोमवार को सोने की कीमत 13,675 रुपये प्रति ग्राम थी। निजी वाणिज्यिक बैंक करीब 9,600 से 10,400 रुपये प्रति ग्राम, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लगभग 8,800 से 9,300 रुपये प्रति ग्राम तक ऋण देते हैं। वहीं, निजी गिरवी कारोबारी, गोल्ड लोन पर केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और ट्रेडिंग कंपनियां करीब 10,500 से 11,000 रुपये प्रति ग्राम तक कर्ज देती हैं।
बैंकों की गोल्ड लोन पर ब्याज दर 14 से 18 प्रतिशत के बीच है। सहकारिता विभाग ने पिछले साल गोल्ड लोन की ब्याज दर 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 13 प्रतिशत कर दी थी।
एक अधिकारी ने कहा कि बढ़ी हुई सीमा से अधिक ग्राहक सहकारी बैंकों की ओर आकर्षित होंगे, जहां वे अपने गिरवी रखे आभूषणों के बदले अधिक राशि प्राप्त कर सकेंगे।
इस बीच, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय में हुई एक बैठक में प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (पीएसीसीएस) के मुनाफे की सीमा 2.25 प्रतिशत तय करने का फैसला किया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि केंद्रीय सहकारी बैंकों से कैश क्रेडिट के जरिए वित्त पोषित पीएसीसीएस के गोल्ड लोन पर ब्याज दर, उन्हीं केंद्रीय सहकारी बैंकों की शाखाओं द्वारा सीधे दिए जाने वाले गोल्ड लोन की दर से 1.25 प्रतिशत कम होगी।
इन फैसलों के जरिए एक ओर आभूषण गिरवी रखने वाले ग्राहकों को मिलने वाली ऋण राशि बढ़ाई गई है, वहीं दूसरी ओर कृषि सहकारी ऋण समितियों के माध्यम से दिए जाने वाले गोल्ड लोन की लागत को भी नियंत्रित करने की कोशिश की गई है।














