नैरोबी। केन्या में पहली बार इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। देश के स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुआले ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति की सोमवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। वह केन्या का नागरिक था और हाल ही में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में रहकर शनिवार को नैरोबी लौटा था।

डुआले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मृतक के संपर्क में आए अब तक 28 लोगों की पहचान की गई है। इनमें उसके परिवार के सदस्य और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने इन सभी पर निगरानी शुरू कर दी है ताकि संक्रमण के संभावित प्रसार का पता लगाया जा सके और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाए जा सकें।

डीआरसी से केन्या आने के दौरान स्क्रीनिंग को लेकर उठते सवालों के बीच उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन से गुजरने से पहले मरीज की जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेकेआईए) पर पोर्ट हेल्थ सुविधा में सामान्य पब्लिक हेल्थ स्क्रीनिंग की गई थी।

स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से न घबराने की अपील करते हुए कहा कि बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

केन्याई मीडिया हाउस 'स्टार' के अनुसार, केन्या में इससे पहले इबोला संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। ऐसे में देश में संक्रमण की पहली पुष्टि ने स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि संक्रमित व्यक्ति हाल ही में डीआर कांगो से लौटा था, जहां इबोला का बड़ा प्रकोप जारी है।

डीआरसी इस समय अपने सबसे बड़े इबोला प्रकोप से जूझ रहा है। वहां संक्रमण के लिए इबोला वायरस का दुर्लभ बुंडीबुग्यो जिम्मेदार बताया गया है। इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा मई के मध्य में की गई थी, हालांकि माना जा रहा है कि संक्रमण इससे कई महीने पहले फैलना शुरू हो गया था।

डीआर कांगो में अब तक 8,000 से अधिक मामले सामने आने और 4,000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की बात कही गई। संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद बीमारी का प्रसार चिंता का विषय बना हुआ है।

इस प्रकोप का असर पड़ोसी देश युगांडा में भी देखा गया था। वहां 20 मामले और दो मौत दर्ज की गई थीं। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अगस्त में युगांडा को इबोला-मुक्त घोषित कर दिया था।

केन्या सरकार ने इस साल की शुरुआत में लाइकिपिया एयर बेस में इबोला सुविधा स्थापित करने की योजना बनाई थी। यह स्थान नैरोबी से करीब 125 मील दूर है। उस समय इस योजना को लेकर स्थानीय लोगों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।

इबोला एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैल सकती है। संक्रमण जीवित और मृत दोनों संक्रमित लोगों से हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, उल्टी और दस्त शामिल हैं। गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है।

केन्या के स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती 28 संपर्कों की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना है कि यदि उनमें संक्रमण के लक्षण सामने आते हैं तो उनकी तुरंत पहचान और जांच हो।

सरकार ने लोगों से घबराने के बजाय स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।