बालाघाट, रितेश सोनी। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र का दक्षिण बैहर अंचल लंबे समय से विकास की चुनौतियों से जूझ रहा है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे बैगा-आदिवासी गांवों में सरकार की विभिन्न योजनाओं के बावजूद बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और पोषण जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य राजनीतिक प्रतिनिधि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी हालात में अपेक्षित बदलाव अब भी दिखाई नहीं दे रहा है।

दौरों के बाद भी क्यों नहीं बदली तस्वीर?

दक्षिण बैहर के बैगा अंचल में नेताओं और अधिकारियों के दौरे लगातार होते रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के बाद राहुल गांधी भी प्रभावित परिवारों से मिले और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इससे पहले अभिजीत दीपके सहित अन्य लोग भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद कर चुके हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों के सामने वही पुराने सवाल खड़े हैं कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।

नल-जल योजना के नल बंद, नाले के पानी पर निर्भरता

ग्रामीणों के अनुसार कई बैगा बस्तियों में पेयजल की समस्या गंभीर बनी हुई है। कहीं नल-जल योजना के नल बंद या खराब पड़े हैं तो कहीं बोरिंग की मोटर खराब अथवा गायब होने की शिकायतें हैं। ऐसे में कुछ परिवारों को नालों और प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए दूर तक जाना पड़ रहा है।

सड़क और बिजली की सुविधा भी चुनौती

दूरस्थ बैगा गांवों तक पक्की सड़कों की कमी भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। बारिश के मौसम में आवागमन की समस्या और बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई इलाकों में बिजली की आपूर्ति भी नियमित नहीं है। ऐसे में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है।

जनमन योजना के मकानों पर भी सवाल

बैगा परिवारों के लिए संचालित प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान यानी पीएम-जनमन योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ परिवारों को अधूरे मकान मिले हैं, जिनमें खिड़की-दरवाजे जैसी मूलभूत सुविधाएं तक पूरी नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब परिवारों को रहने योग्य पूर्ण आवास उपलब्ध हो।

उज्ज्वला योजना के बावजूद लकड़ी से खाना पकाने की मजबूरी

सरकार की उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है, लेकिन दक्षिण बैहर के ग्रामीण इलाकों से शिकायतें हैं कि कई परिवार आज भी खाना पकाने के लिए जंगल से लकड़ी लाने को मजबूर हैं। इससे योजना के लाभ की वास्तविक पहुंच और गैस सिलेंडर के नियमित उपयोग को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

पोषण और टेक-होम राशन वितरण पर भी सवाल

बैगा अंचल में बच्चों और महिलाओं के पोषण को लेकर भी ग्रामीणों की शिकायतें सामने आती रही हैं। टेक-होम राशन और पोषण आहार के वितरण में अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पात्र परिवारों और बच्चों तक समय पर पोषण सामग्री नहीं पहुंचती है, तो कुपोषण से निपटने के सरकारी प्रयासों का उद्देश्य प्रभावित होता है।

बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

बैगा अंचल में बच्चों की मौतों की घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी सेवाओं की पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विभिन्न मामलों में मलेरिया, खसरा और अन्य संक्रमण की बात सामने आई, जबकि कुपोषण तथा समय पर उपचार उपलब्ध नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए गए। घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हुईं और प्रभावित क्षेत्रों में जांच एवं उपचार का काम तेज किया गया।


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ग्रामीणों का सवाल है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और उपचार व्यवस्था पहले से प्रभावी तरीके से सक्रिय रहती, तो क्या परिस्थितियां इतनी गंभीर होतीं। यही सवाल अब प्रशासनिक जवाबदेही और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी से जुड़ गया है।

अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच रिपोर्ट का इंतजार

बैगा बच्चों की मौतों के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति की जानकारी लेने और जांच किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, ग्रामीणों और स्थानीय स्तर पर अभी भी जांच रिपोर्ट के सामने आने का इंतजार है। रिपोर्ट के निष्कर्षों से मौतों के कारणों और सरकारी व्यवस्थाओं की स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

राजनीतिक दौरे बढ़े, अब जमीन पर परिणाम की उम्मीद

बच्चों की मौतों और बैगा परिवारों की समस्याओं के सामने आने के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हुईं। अभिजीत दीपके और राहुल गांधी प्रभावित परिवारों से मिले। राहुल गांधी ने ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सुनीं और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सरकारी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।

वहीं, सरकार की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए मेडिकल अधिकारियों की नियुक्ति, नए स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल यूनिट जैसी व्यवस्थाओं की घोषणाओं की बात कही गई है। अब ग्रामीणों की निगाह इस बात पर है कि इन घोषणाओं का वास्तविक असर दूरस्थ बैगा बस्तियों तक कब और किस रूप में पहुंचता है।

घोषणाओं से आगे बढ़कर जवाबदेही की जरूरत

दक्षिण बैहर की स्थिति सिर्फ एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के अंतिम छोर तक पहुंचने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की परीक्षा भी है। ग्रामीणों को पानी, सड़क, बिजली, आवास, पोषण और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केवल घोषणाओं के बजाय नियमित निगरानी, संसाधनों की उपलब्धता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही जरूरी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बैगा अंचल में होने वाले राजनीतिक और प्रशासनिक दौरों के बाद क्या बदलाव स्थायी रूप से जमीन पर दिखाई देगा, या फिर कुछ समय बाद यह इलाका दोबारा उसी उपेक्षा और समस्याओं के बीच छोड़ दिया जाएगा।