मथुरा। मथुरा-वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज के शिष्य (परिकर) रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घटना वृंदावन के वराह घाट मार्ग स्थित गऊ कृपा कुंज आश्रम की है, जहां आश्रम की छत से नीचे गिरने के कारण साधक की जान चली गई। प्राथमिक रूप से यह बात भी सामने आई कि मृतक का गुप्तांग कटा हुआ था और अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंची तथा शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस शुरुआती तौर पर आत्महत्या और अन्य सभी संभावित कोणों से मामले की गहन तफ्तीश कर रही है। आश्रम प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि उक्त गऊ कृपा कुंज आश्रम में पूज्य महाराज जी स्वयं निवास नहीं करते हैं।
केली कुंज और बेलवान आश्रम में दीक्षा कार्यक्रम व दर्शन व्यवस्था पर तत्काल रोक
शिष्य की असामयिक और संदिग्ध मौत के बाद आश्रम प्रबंधन ने व्यवस्थाओं को लेकर बेहद कड़े कदम उठाए हैं। केली कुंज आश्रम की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, दीक्षा देने के संपूर्ण कार्यक्रम को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इसके साथ ही आम श्रद्धालुओं के लिए टोकन व्यवस्था के माध्यम से होने वाले दर्शनों पर भी आगामी आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यमुना विहार कुंज (बेलवान) स्थित आश्रम में, जहां पहले से दीक्षित भक्तों को दर्शन सुलभ कराए जा रहे थे, वहां भी दर्शन व्यवस्था को बंद कर दिया गया है। आश्रम के सेवादारों द्वारा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को इन नए नियमों से अवगत कराया जा रहा है।
शिष्यों के लिए सख्त हुआ ड्रेस कोड: विरक्त और गृहस्थ साधकों के लिए अलग नियम तय
व्यवस्थाओं में अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आश्रम ने शिष्यों के पहनावे (ड्रेस कोड) को लेकर भी नई नियमावली जारी की है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जो भी शिष्य गृहस्थ या विरक्त होने के साथ-साथ किसी व्यवसाय, दुकान या ठेला आदि के संचालन से जुड़े हैं, वे अब केवल सामान्य परिधान या कुर्ता-पायजामा ही पहनेंगे। इसके अतिरिक्त, जो शिष्य गृहस्थ जीवन में रहते हुए महाराज जी या केली कुंज की सेवा में योगदान दे रहे हैं, उनके लिए भी सामान्य वस्त्र या कुर्ता-पायजामा अनिवार्य किया गया है।
निर्देश में साफ किया गया है कि सफेद वस्त्र (साधक वेश) धारण करने की अनुमति अब केवल उन्हीं विरक्त शिष्यों को दी जाएगी, जो प्रत्यक्ष रूप से पूज्य महाराज जी की सेवा या केली कुंज की आंतरिक व्यवस्थाओं में पूर्णकालिक रूप से समर्पित हैं। आश्रम प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा, अनुशासन और पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कड़े बदलाव लागू किए गए हैं।














