छतरपुर, रोहित पाठक। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लुधियाना में धर्मांतरण और हिंदू राष्ट्र को लेकर दिए अपने बयान पर उठे विवाद के बीच एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वे इस्लाम या ईसाई समुदाय के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि धर्मांतरण कराने वालों और देश को तोड़ने वाली मानसिकता के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि भोले-भाले हिंदुओं को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण कराने के खिलाफ उनकी आवाज पहले भी थी, आज भी है और आगे भी रहेगी।
‘माफी मांगने की जरूरत नहीं’
धर्मांतरण को लेकर एक इमाम की ओर से कथित तौर पर माफी मांगने की मांग पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उन्हें माफी मांगने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब धर्मांतरण गलत है तो इसे जायज कैसे माना जा सकता है। उन्होंने अपने बयान में कानून और संविधान का हवाला देते हुए धर्मांतरण के मुद्दे पर अपनी आपत्ति दोहराई और कहा कि लुधियाना में उन्होंने नशा, धर्मांतरण और पाखंडवाद के खिलाफ आवाज उठाई थी।
रथ यात्रा के विरोध पर बोले- ‘भारत में नहीं निकलेगी तो क्या पाकिस्तान में निकलेगी?’
रथ यात्रा के विरोध को लेकर भी धीरेंद्र शास्त्री ने बिना किसी का नाम लिए टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं की रथ यात्रा है और सवाल किया कि अगर रथ यात्रा भारत में नहीं निकलेगी तो क्या पाकिस्तान में निकलेगी। विरोध करने वालों पर उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोग ‘सनकी बातें’ करते हैं और उन्होंने नशे को लेकर भी तंज कसा।
‘हिंदुओं के बच्चों और बेटियों को बचाने आए हैं’
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनका उद्देश्य हिंदू बच्चों को बचाना है। उन्होंने कहा कि वे हिंदू बेटियों को बुर्के में और हिंदू बच्चों को मस्जिदों में जाते हुए नहीं देखना चाहते। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की बात करना गलत है तो वे यह गलती करते रहेंगे। उन्होंने हिंदुओं से सत्य बोलने का आह्वान करते हुए कहा कि हिंदुओं को डरना नहीं चाहिए।
धार्मिक स्थलों की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
उन्होंने माताओं और बहनों से अकेले धार्मिक स्थलों पर नहीं जाने की अपील की। साथ ही धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और वहां मौजूद कथित गंदगी पर भी सवाल उठाए। धीरेंद्र शास्त्री ने एक बार फिर हिंदू राष्ट्र की बात दोहराते हुए कहा कि “तुम मेरा साथ दो, हम हिंदू राष्ट्र देंगे।”













