वाशिंगटन/ बेंगलुरु, 4 नवंबर । अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स ने जबरदस्त जीत हासिल की है। उनकी जीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके दल रिपब्लिकन के लिए किसी झटके से कम नहीं है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। तो हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 218 सीटें जीतकर बहुमत आंकड़ा पार कर लिया है। कर्नाटक के बेंगलुरु में कुछ अमेरिकी नागरिक एक ही जगह इकट्ठे हुए और मिलकर मिडटर्म इलेक्शन के परिणामों को देखा। आईएएनएस से बातचीत में माना कि देश में आया ये बदलाव जरूरी था। बेंगलुरु में कार्यरत अमेरिकी मूल की महिला जेनेट ने कहा, " हम साथ मिलकर परिणाम देख रहे थे। मैं बहुत ज्यादा खुश और आह्लादित हूं। डेमोक्रेट्स ने कमाल कर दिया। सीनेट और हाउस दोनों में जबरदस्त प्रदर्शन किया। इस ब्ल्यू सुनामी (डेमोक्रेट पार्टी के झंडे का मुख्य रंग) की जरूरत थी। मैं रिपब्लिकन की नीतियों से प्रसन्न नहीं थी। मुझे लगता है कि अमेरिका नींद से जगा और अब उम्मीद है कि स्थिति वैसी नहीं रहेगी, कुछ बदलाव तो होगा।"
उन्होंने आगे कहा कि मुद्दे कई थे। इसमें ईरान से लेकर भ्रष्टाचार तक को लेकर लोग नाराज रहे। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज टैरिफ थी। जानबूझकर इसे थोपा गया ये पूरी तरह अस्वीकार्य था।
वहीं, भारत की रहने वाली अमेरिकी नागरिक ने भी जीत को अप्रत्याशित बताया। बोलीं ये खुशी की बात है। प्रेसिडेंट ट्रंप की नीतियां चाहें आव्रजन को लेकर हो सब आम नागरिकों के हित में नहीं थीं। डेमोक्रेट्स तो बॉर्डर स्टेट में भी जीते। कंसास में तो 1932 के बाद जीत हासिल की ये बड़ी जीत है। डेमोक्रेट्स के उम्मीदवार शानदार रहे।
कांग्रेसमैन हकीम जेफ्रीज का हवाला देते हुए उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका ने आज एक बड़ा कमबैक किया है। पिछले दो साल में राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ, विदेश नीति और इमिग्रेशन से जुड़ी नीतियां पूरी तरह बैकफायर हुईं। ये नीतियां न तो लोगों के हित में थीं और न ही नागरिकों के हित में।
मुद्दों को लेकर उन्होंने कहा, "इस बार चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा इकोनॉमी और अफोर्डेबिलिटी रहा। कुछ राज्यों में गैस की कीमत 8 डॉलर तक पहुंच गई, जो रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित करती है। टैरिफ और ट्रेड से जुड़े फैसलों ने इकोनॉमी को और ज्यादा खराब कर दिया। लोगों को पहले जैसा जीवन जीना मुश्किल हो गया था।"
उन्होंने आगे कहा कि बड़ी संख्या में इंडियन-अमेरिकन वोटर्स ने मतदान में हिस्सा लिया। कई ऐसे लोग भी वोट देने आए, जो पहले सोचते थे कि उनका एक वोट मायने नहीं रखता। इस बार हर वोट की अहमियत समझ में आई। विदेश में रह रहे अमेरिकी नागरिकों के लिए 'वोटफ्रॉमबोर्ड डॉट ओआरजी' जैसी सुविधाओं ने वोटिंग को आसान बनाया, जहां 24x7 मदद उपलब्ध थी।
उनके मुताबिक अब चेक एंड बैलेंस का वक्त आएगा। बोलीं," अब सीनेट और कांग्रेस में बदलाव के बाद राष्ट्रपति पर चेक एंड बैलेंस लागू होगा। अब कोई भी नीति आसानी से थोपी नहीं जा सकेगी। डेमोक्रेट्स से हेल्थकेयर, इकोनॉमी में सुधार और नौकरियां बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।
बेंगलुरु में रह रहे अमेरिकी नागरिक राज पेल्लई ने कहा, " देश को बदलाव की जरूरत थी और अब लोगों को सेमी मैंडेट मिला है। चाहे रेड स्टेट हो या ब्लू स्टेट, लोग परेशान हैं। आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को नजरअंदाज किया गया।"
वहीं इस चुनाव में रिपब्लिकन की हार पर कहा कि इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर यह है कि अब ट्रंप हार्ड-राइट सुप्रीम कोर्ट जस्टिस नियुक्त नहीं कर पाएंगे। दो जज रिटायर होना चाहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। डेमोक्रेट्स को आज जश्न मनाना चाहिए, लेकिन कल से फिर काम पर लौटना होगा।

















