भोपाल। मॉडल से संन्यास की राह चुनकर साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने सनातन परंपरा के शीर्ष धर्माचार्यों और संतों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। एक बेहद आक्रामक वीडियो जारी करते हुए हर्षा ने शंकराचार्य सहित कई प्रमुख संतों को 'तथाकथित संत', 'समाज का ठेकेदार' और 'दोगला' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक मंचों पर उनके एंकरिंग और मंच संचालन को लेकर अपमानित करने वाले और उन्हें 'नचनिया' व 'पाखंडी' कहने वाले संत अब सोशल मीडिया स्टार अंजलि अरोड़ा द्वारा माता सीता का किरदार निभाने पर पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं। वीडियो में हर्षा ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, निरंजनी अखाड़ा पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप, महाराज अलीनानंद, महामंडलेश्वर मां योग योगेश्वरी और आचार्य तन्मय वेद के दातार की तस्वीरें साझा करते हुए उनसे सीधे जवाब की मांग की है।


'क्या संतों ने जमीर बेच दिया? मेरे लिए अलग कसौटी क्यों': हर्षा रिछारिया

वीडियो में अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए हर्षानंद गिरि ने कहा कि जब उन्होंने संन्यास धारण किया और धार्मिक मंचों पर संचालन किया, तो इन्हीं धर्माचार्यों ने उन्हें सनातन धर्म को बदनाम करने वाली करार दिया। उनके हर कदम पर सवाल उठाए गए और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।

हर्षा ने सीधा सवाल दागा:

"जिन संतों ने मेरे मंच संचालन पर सवाल उठाए, मुझे सनातन को कलंकित करने वाली कहा, 'नचनिया' और 'पाखंडी' तक के तमगे दिए... वही संत आज अंजलि अरोड़ा के माता सीता की भूमिका निभाने पर खामोश क्यों हैं? यह खुला दोगलापन नहीं है तो और क्या है? क्या तथाकथित संतों ने अपना जमीर बेच दिया है?"


उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ संतों को उनके काम से इसलिए ऐतराज था क्योंकि वे खुद मंचों पर लाइमलाइट में रहना चाहते थे। उन्होंने कहा कि अंजलि अरोड़ा के अतीत के बोल्ड डांस वीडियो सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं, उसके बावजूद संतों की जुबान बंद है, जबकि एक ऐसी लड़की को निशाना बनाया गया जिसका ऐसा कोई विवादित अतीत ही नहीं था।


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'मैं जवाब मांगने की पूरी हकदार हूं'

हर्षा ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ उनकी निजी जंग नहीं है, बल्कि उस दोहरे मापदंड के खिलाफ आवाज है जिसके तहत उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित और लांछित किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्हें चुन-चुनकर निशाना बनाया गया, उसके बाद आज इस दोहरे रवैये पर संतों से तीखे सवाल पूछने का उन्हें पूरा नैतिक और संवैधानिक अधिकार है। कोई और सवाल पूछे या न पूछे, लेकिन वे अपना जवाब लेकर रहेंगी।


अंजलि अरोड़ा के 'सीता' किरदार पर पहले ही उठ चुके हैं सवाल

गौरतलब है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंजलि अरोड़ा ने 25 सितंबर को रिलीज हुई फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा-श्री राम की' में माता सीता की भूमिका निभाई है। फिल्म के ट्रेलर रिलीज के बाद से ही सोशल मीडिया पर उनके चयन और अतीत के वीडियो को लेकर भारी विवाद व ट्रोलिंग देखने को मिली थी। हालांकि, ट्रेलर लॉन्च के दौरान अंजलि अरोड़ा ने ट्रोलिंग पर जवाब देते हुए कहा था कि दर्शक कलाकार की निजी जिंदगी और पर्दे के किरदार को अलग रखकर देखें। उन्होंने यह भी कहा था कि डांस करना उनका शौक रहा है और इस पर उन्हें कोई शर्मिंदगी नहीं है। इसी पृष्ठभूमि का हवाला देकर अब साध्वी हर्षा रिछारिया ने संतों की चुप्पी को धर्म की ठेकेदारी और सुविधा की राजनीति करार देते हुए संत समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया है।