छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को नहीं मिली राहत

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छिंदवाड़ा,जीशान अंसारी। छिंदवाड़ा के बहुचर्चित कफ सिरप कांड में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। दो दर्जन से अधिक बच्चों की मौत से जुड़े इस मामले में मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी सहित चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि डॉ. प्रवीण सोनी को संबंधित कफ सिरप के खतरनाक प्रभावों की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर बच्चों को यह दवा लिखी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी डॉक्टर अपनी पत्नी के नाम पर मेडिकल स्टोर संचालित कर रहे थे और मरीजों को उसी दुकान से दवा खरीदने के लिए पर्चा लिखते थे।
जांच एजेंसियों ने कोर्ट को बताया कि डॉ. सोनी को दवा निर्माता कंपनी से लगभग 10 प्रतिशत कमीशन भी मिलता था। इसके अलावा, उन्हें पहले से यह जानकारी थी कि उक्त कफ सिरप चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित है और पूर्व में इसी दवा के सेवन से बच्चों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद सरकारी निर्देशों की अनदेखी की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने डॉ. प्रवीण सोनी, ज्योति सोनी, राजेश सोनी और सौरभ जैन—चारों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
सरकारी पक्ष की ओर से पेश हुए चंद्रमोहन तिवारी ने अदालत में आरोपियों की भूमिका को अत्यंत गंभीर बताया, जिसके बाद कोर्ट ने यह कड़ा फैसला सुनाया।
